नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने व्यक्तिगत मतदाता के Form 7 आवेदनों की संख्या सीमित कर दी है। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की पूरी अवधि में एक मतदाता अधिकतम 10 आवेदन दे सकेगा, जबकि मतदाता सूची के लगातार अपडेट के दौरान हर महीने अधिकतम पांच आवेदन की सीमा होगी। ये सीमाएं ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों पर लागू हैं।
सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे निर्देश में आयोग ने कहा कि व्यक्तिगत मतदाताओं की ओर से बिना पुष्ट आधार के बड़ी संख्या में आपत्तियां आने के मामले सामने आए हैं। इससे जिन मतदाताओं के नाम पर आपत्ति की जाती है, उन्हें अनावश्यक परेशानी होती है और मैदानी कर्मचारियों का काम बढ़ता है।
Form 7 का उपयोग किसलिए होता है
किसी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम शामिल करने के प्रस्ताव पर आपत्ति या नाम हटाने का आवेदन Form 7 में दिया जाता है। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2) का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि ऐसा आवेदन केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसका नाम पहले से उस निर्वाचन क्षेत्र की सूची में दर्ज हो। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को नियमों के अनुसार जांच करनी होती है; आवेदन मिलने से अपने-आप किसी मतदाता का नाम नहीं हटता।
9 अक्टूबर के पत्र पर अवर सचिव संदीप कुमार के हस्ताक्षर हैं। इसमें दावे-आपत्तियों की अवधि और सूची के निरंतर अपडेट के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। पहली स्थिति में पूरी अवधि के लिए प्रति व्यक्ति 10 आवेदन की कुल सीमा है; दूसरी में प्रति व्यक्ति हर महीने पांच आवेदन की सीमा है।
ऑनलाइन और कागजी आवेदनों के लिए समान व्यवस्था
आयोग के अनुसार, ऑनलाइन माध्यम में एक बार में छह आवेदन की सीमा पहले से थी, जिनके निस्तारण के बाद आगे आवेदन किए जा सकते थे। लेकिन बड़ी संख्या में प्रस्तुत कागजी फॉर्म की कोई निश्चित संख्या तय नहीं थी और निर्णय ERO के विवेक पर छोड़ दिया गया था। इससे मैदानी अधिकारियों को कठिनाइयां हो रही थीं। अब दोनों माध्यमों में व्यक्तिगत मतदाता की ओर से सामूहिक आपत्तियां हतोत्साहित करने के लिए संख्या तय की गई है।
पत्र में मतदाता सूची नियमावली, 2023 का उल्लेख है। इसके अनुसार, व्यक्तिगत मतदाता की ओर से एक साथ बड़ी संख्या में प्रस्तुत दावे और आपत्तियां, डाक से भेजे गए आवेदन सहित, स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए। एक ही व्यक्ति पांच से अधिक मामलों में आपत्तिकर्ता हो तो ERO द्वारा व्यक्तिगत सत्यापन का प्रावधान भी बताया गया है।
राजनीतिक दलों के बूथ एजेंट की व्यवस्था अलग
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) को आयोग पहले से सामूहिक आवेदन देने की अनुमति दे चुका है। प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले BLA, बूथ लेवल अधिकारी (BLO) को दिन में अधिकतम 50 फॉर्म और उसके बाद दिन में अधिकतम 10 फॉर्म दे सकता है। पत्र में इस मौजूदा व्यवस्था का उल्लेख व्यक्तिगत मतदाताओं की नई सीमा से अलग किया गया है।
असली हस्ताक्षर और सुनवाई जरूरी
Form 7 में पूरी जानकारी और निर्धारित स्थान पर आपत्तिकर्ता के हस्ताक्षर होने चाहिए। हस्ताक्षर की मुहर असली हस्ताक्षर की जगह नहीं ले सकती। ERO को मतदाता सूची के विवरण से आवेदक की प्रामाणिकता जांचनी होगी। निर्धारित अवधि, फॉर्म या प्रक्रिया के अनुसार न दिए गए दावे और आपत्तियां नियम 17 के तहत खारिज किए जाने हैं।
यदि आपत्ति का निस्तारण नियम 17 या 18 के तहत नहीं होता, तो ERO पहले आपत्तिकर्ता को नोटिस देगा, व्यक्तिगत सुनवाई करेगा और प्रत्येक Form 7 के लिए अलग बयान दर्ज करेगा। आदेश देने से पहले जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति की गई है, उसे भी नियम 19 और 20 के अनुसार सुनवाई का अवसर देना होगा।
शिकायत झूठी या गढ़ी हुई पाए जाने पर जानबूझकर गलत लिखित बयान या घोषणा देने वाले आवेदक के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई के निर्देश हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को ये निर्देश ERO, सहायक ERO और मैदानी कर्मचारियों तक पहुंचाने तथा पर्याप्त प्रचार करने को कहा गया है।
वोट चोरी के आरोपों के बीच निर्देश
ये निर्देश विपक्ष के “वोट चोरी” अभियान के बीच आए हैं। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपने आरोपों पर ज्ञापन सौंपा और राहुल गांधी ने मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन देने की योजना बताई। यह राजनीतिक विवाद व्यापक पृष्ठभूमि है; आयोग का Form 7 निर्देश आपत्तियां दाखिल करने और उनकी जांच की प्रक्रिया से संबंधित है।

