
नई दिल्ली: अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को एक वर्ष तक शांति और अच्छा आचरण बनाए रखने के लिए ₹50,000 का जमानती बांड भरने के बाद दिल्ली कैंट की एसईएम अदालत ने रिहा कर दिया। दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को यह जानकारी दी।
पुलिस के बयान के अनुसार, तीनों को 10 अक्टूबर को बीएनएसएस की धाराओं 126/170 के तहत निवारक कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 11 अक्टूबर को एसईएम अदालत में पेश किया गया।
दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। बयान में बांड को जमानती बांड के रूप में भरा गया बेल बांड बताते हुए कहा गया कि इसके बाद अदालत ने तीनों को रिहा कर दिया।
दादी के निधन की सूचना पर माँ ने उठाए सवाल
एक अलग पोस्ट में पुलिस ने दीपके की माँ अनीता दीपके के आरोपों पर जवाब दिया। मामला दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दिए जाने और अंतिम संस्कार के लिए घर लौटने से जुड़ा था।
पुलिस की पोस्ट में महाराष्ट्र के हिंगोली से एएनआई की एक रिपोर्ट का चित्र साझा किया गया। इसमें अनीता दीपके के हवाले से कहा गया कि परिवार उनसे संपर्क नहीं कर पाया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि बेटे को दादी के निधन की खबर मिली होती, तो वह तुरंत आ जाता। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने उसके इंतज़ार में अंतिम संस्कार रोक रखा था।
पुलिस का दावा: घर जाने के लिए सहायता की पेशकश की
दिल्ली पुलिस ने कहा कि दादी के निधन की जानकारी दीपके को संवेदनशीलता के साथ तुरंत दी गई थी। पुलिस के अनुसार, उन्हें अंतिम संस्कार का निर्धारित समय भी बताया गया था।
पुलिस ने दावा किया कि मानवीय आधार पर उनके गृहनगर जाने की व्यवस्था में हरसंभव सहायता की पेशकश की गई, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इनकार कर दिया। पुलिस का यह पक्ष उनकी माँ के उस आरोप से अलग है कि सूचना मिलने पर वह तुरंत घर आ जाते।
आगे की खबर: डीसीपी नेहा यादव का पक्ष और फोन तथा वकील तक पहुँच पर दीपके का जवाब पढ़ें।

