नई दिल्ली: टाटा पावर-डीडीएल के डिमांड रिस्पॉन्स कार्यक्रम से छह वर्षों के दौरान बिजली की अधिकतम मांग यानी पीक लोड में संचयी रूप से करीब 1,900 मेगावाट की कमी आई है। कंपनी के सीईओ द्विजदास बसाक ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की एक परिचर्चा में यह जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में लगभग 2.2 लाख उपभोक्ता कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
बसाक ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत 2014 में स्वचालित डिमांड रिस्पॉन्स पायलट से हुई थी। वर्ष 2022 में इसे उपभोक्ताओं की भागीदारी पर केंद्रित व्यवहार-आधारित मॉडल की ओर बढ़ाया गया। वे ऊर्जा बदलाव में डिमांड रिस्पॉन्स, उपभोक्ता भागीदारी और एआई की भूमिका पर आयोजित सत्र में बोल रहे थे।

आर्थिक प्रोत्साहन से आगे उपभोक्ता भागीदारी
बसाक के अनुसार, उपभोक्ताओं के साथ लगातार संपर्क, पर्यावरणीय लाभों की जानकारी और बेहतर प्रदर्शन करने वालों को मान्यता देने से भागीदारी बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता केवल आर्थिक प्रोत्साहन के बजाय पर्यावरण और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के अवसर से भी प्रेरित हो रहे हैं।
एआई और साझा मानकों की भूमिका
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उपभोक्ताओं के समूह पहचानने, ऐसी बिजली खपत चिन्हित करने जिसे समय के अनुसार बदला जा सके और खपत के रुझानों का विश्लेषण करने में मदद मिल सकती है। इससे लक्षित उपायों और बिजली नेटवर्क की योजना को सहारा मिलेगा।
बसाक ने विभिन्न वितरण कंपनियों में डिमांड रिस्पॉन्स कार्यक्रमों का विस्तार करने के लिए साझा प्लेटफॉर्म और मानकों की जरूरत भी बताई।
यह परिचर्चा मानेकशॉ सेंटर में सीईए के 53वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का हिस्सा थी। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, प्रल्हाद जोशी और श्रीपद येसो नाइक तथा सीईए अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद मौजूद थे।

