नई दिल्ली, 17 अक्टूबर: कैंसर उपचार के बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने 137 गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है और निर्माताओं को पहली बिक्री के मूल्य के आधार पर अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP दोबारा निर्धारित करने का निर्देश दिया है। संशोधित कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग द्वारा जारी और 17 अक्टूबर को भारत के राजपत्र में प्रकाशित आदेश में औषध (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 यानी DPCO के पैराग्राफ 19 के तहत उपलब्ध असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया गया है।
यह व्यवस्था स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के तहत गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा सुझाई गई 137 गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं पर लागू होगी।
NPPA ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेटेंट वाली दवाएं भी इस आदेश के दायरे में आएंगी, जब तक उन्हें DPCO के पैराग्राफ 32 के तहत विशेष छूट न मिली हो।
सरकार ने आदेश में कहा है कि भारत में कैंसर का उपचार मरीजों और उनके परिवारों पर गंभीर आर्थिक बोझ डालता है और कई मामलों में विनाशकारी स्वास्थ्य व्यय का कारण बनता है।
राज्य सरकारों, मरीजों, नागरिक समाज और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से कैंसर-रोधी दवाओं की ऊंची कीमतों को लेकर चिंता जताई गई थी। खासतौर पर उस अंतर को लेकर सवाल उठे थे, जो दवा की खरीद कीमत और मरीज से वसूले जाने वाले MRP के बीच पाया जाता है।
आदेश के अनुसार, विशेष रूप से महंगी कैंसर दवाओं पर अत्यधिक ट्रेड मार्जिन मरीजों का खर्च काफी बढ़ा सकता है।
इस आदेश के लिए ट्रेड मार्जिन का अर्थ निर्माता द्वारा स्टॉकिस्ट या वितरक को दवा बेचने की कीमत और मरीज से वसूले जाने वाले GST रहित MRP के बीच का अंतर है।
राष्ट्रीय आवश्यक औषध सूची 2022 में कुल 388 दवाएं हैं, जिनमें 63 कैंसर-रोधी दवाएं पहले से DPCO के तहत मूल्य नियंत्रण में हैं।
नया आदेश उन 137 गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं को लक्षित करता है जिनमें बाजार आंकड़ों के विश्लेषण के दौरान कुछ मामलों में काफी अधिक ट्रेड मार्क-अप पाया गया।
सरकार ने यह भी पाया कि खुदरा बाजार और अस्पतालों के माध्यम से बेची जाने वाली दवाओं के मूल्यों में अंतर था और MRP पर अलग-अलग स्तर की छूट दी जा रही थी। इससे यह संकेत मिला कि छपा हुआ MRP और वास्तविक लेन-देन मूल्य कई मामलों में काफी अलग हो सकता है।
नई व्यवस्था के तहत निर्माता को Price to Stockist या Price to Distributor यानी PTS/PTD के आधार पर MRP तय करना होगा और उसके ऊपर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगा।
जिन उत्पादों की मार्च 2026 में बिक्री हुई थी, उनके लिए उसी महीने का औसत PTS/PTD आधार बनेगा।
यदि किसी दवा की मार्च 2026 में बिक्री नहीं हुई थी तो अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक की बिक्री के आधार पर औसत PTS/PTD निकाला जाएगा। इस गणना से सरकारी बिक्री को बाहर रखा जाएगा।
31 मार्च 2026 के बाद बाजार में आई किसी सूचीबद्ध गैर-अनुसूचित कैंसर दवा के लिए मौजूदा PTS/PTD के आधार पर MRP निर्धारित होगा।
राजपत्र में दिए उदाहरण से इस व्यवस्था के संभावित असर को आसानी से समझा जा सकता है।
यदि किसी गैर-अनुसूचित कैंसर दवा का वर्तमान MRP ₹300 प्लस लागू GST है और उसका PTS/PTD ₹70 है, तो 30 प्रतिशत ट्रेड मार्जिन फॉर्मूले के तहत उसका अधिकतम अनुमेय संशोधित MRP ₹100 प्लस लागू GST होगा।
यदि किसी निर्माता का मौजूदा MRP नई गणना से अधिक है तो उसे कीमत घटानी होगी।
लेकिन यदि कोई दवा पहले से नई गणना से कम MRP पर बेची जा रही है तो निर्माता को वही कम कीमत बनाए रखनी होगी। वह नए अधिकतम मूल्य तक कीमत नहीं बढ़ा सकता।
यह आदेश सूची में शामिल 137 दवाओं वाली सभी गैर-अनुसूचित फॉर्मुलेशन पर लागू होगा, चाहे दवा अकेले इस्तेमाल हो या किसी संयोजन में और उसकी strength, dosage form या देने के तरीके में कोई भी अंतर हो।
सूची में Abemaciclib, Abiraterone acetate, Acalabrutinib, Atezolizumab, Bevacizumab, Cetuximab, Daratumumab, Durvalumab, Enzalutamide, Ibrutinib, Nivolumab, Olaparib, Osimertinib, Palbociclib, Pembrolizumab, Pertuzumab, Ribociclib, Sunitinib, Venetoclax और Zanubrutinib सहित कई महत्वपूर्ण और महंगी कैंसर दवाएं शामिल हैं।
आदेश में यह भी कहा गया है कि सूचीबद्ध दवा वाली फॉर्मुलेशन यदि किसी अन्य चिकित्सीय उपयोग में इस्तेमाल होती है, तब भी नई मूल्य व्यवस्था लागू होगी।
NPPA ने इससे पहले 2019 में 42 गैर-अनुसूचित कैंसर-रोधी दवाओं पर पायलट आधार पर Trade Margin Rationalisation लागू किया था। सरकार के अनुसार उस हस्तक्षेप से मरीजों को महत्वपूर्ण बचत हुई थी।
नया फैसला NPPA की 8 अक्टूबर तथा 16 और 17 अक्टूबर को हुई बैठकों में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया। प्राधिकरण ने माना कि बाजार में विकृतियों को दूर करने, अनुचित मुनाफे पर अंकुश लगाने और उचित तथा किफायती कीमत सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप जरूरी है।
निर्माताओं को आदेश प्रकाशित होने की तारीख से सात दिनों के भीतर सूचीबद्ध दवाओं वाली सभी गैर-अनुसूचित फॉर्मुलेशन की निर्धारित जानकारी NPPA को देनी होगी, चाहे उनके MRP में बदलाव हो या नहीं।
निर्माताओं को संशोधित मूल्य की जानकारी सात दिनों के भीतर NPPA और संबंधित राज्य औषध नियंत्रक को भी जमा करनी होगी।
जानकारी जमा न करना MRP में आवश्यक कमी न करने के समान माना जा सकता है और DPCO के तहत अधिक वसूली की रकम वापस लेने की कार्रवाई शुरू हो सकती है।
निर्माताओं को IPDMS के माध्यम से संशोधित मूल्य सूची जारी करनी होगी और उसकी प्रतियां राज्य औषध नियंत्रकों, डीलरों और संबंधित संस्थाओं को उपलब्ध करानी होंगी।
खुदरा विक्रेताओं, डीलरों, अस्पतालों और संस्थानों को निर्माता द्वारा उपलब्ध कराई गई मूल्य सूची अपने परिसर में ऐसी प्रमुख जगह पर लगानी होगी जहां उपभोक्ता आसानी से उसे देख सकें।
निर्माताओं को संशोधित MRP सूची डीलरों और खुदरा विक्रेताओं तक पहुंचाने के साथ प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर मूल्य कटौती की सूचना भी देनी होगी।
कंपनियों को अपनी वेबसाइट के होमपेज पर DPCO से संबंधित एक समर्पित अनुभाग बनाकर मूल्य अधिसूचना और संशोधित MRP का विवरण भी प्रकाशित करना होगा।
अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को भी नई व्यवस्था के अनुपालन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है क्योंकि बड़ी मात्रा में कैंसर दवाएं सीधे अस्पतालों को सप्लाई होती हैं।
यदि कोई निर्माता किसी अस्पताल या चिकित्सा संस्थान को सीधे दवा देता है तो उस अस्पताल या संस्थान को MRP गणना के उद्देश्य से स्टॉकिस्ट या वितरक माना जाएगा।
अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को संशोधित MRP की निगरानी करनी होगी, नई कीमतें अपनी वेबसाइट पर प्रमुखता से दिखानी होंगी और किसी भी उल्लंघन की जानकारी NPPA को देनी होगी।
राज्य औषध नियंत्रक भी निर्माताओं, डीलरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों द्वारा आदेश के पालन की निगरानी करेंगे।
निर्माताओं को वर्तमान उत्पादन स्तर बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है। औसत मासिक उत्पादन घटाने से पहले NPPA की अनुमति जरूरी होगी।
किसी सूचीबद्ध फॉर्मुलेशन का उत्पादन या आयात बंद करने की योजना बनाने वाले निर्माता को प्रस्तावित तारीख से कम से कम छह महीने पहले NPPA को जानकारी देनी होगी।
निर्माताओं के Patient Assistance Programmes के तहत मरीजों को मुफ्त दी जाने वाली दवाओं की मात्रा कुछ शर्तों के अधीन PTS/PTD और MRP गणना से बाहर रखी जा सकती है।
इसके लिए निर्माता को मरीज, बीमारी, निर्धारित दवा और इस्तेमाल की गई दवा से संबंधित निर्धारित रिकॉर्ड रखने होंगे और NPPA को आवश्यक घोषणा देनी होगी।
NPPA को अतिरिक्त जानकारी मांगने, ऑडिट या निरीक्षण करने और Patient Assistance Programme के क्रियान्वयन का स्वतंत्र सत्यापन करने का अधिकार रहेगा।
आदेश के तहत निर्धारित कीमतें अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगी।
नियमों का पालन न करने वाले निर्माताओं से अधिक वसूली गई राशि ब्याज सहित वसूल की जा सकती है।

