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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 15 साल पुराने ऑटो-थेफ्ट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया; म्यांमार सीमा के पास ‘अंडरग्राउंड ग्रुप्स’ के लिए ले जाई गई कारें बरामद

नई दिल्ली, 17 अगस्त: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर एक कथित संगठित वाहन चोरी और बिक्री नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो पुलिस के अनुसार करीब 15 वर्षों से सक्रिय था। मणिपुर के उखरुल जिले में म्यांमार सीमा के पास से दो चोरी की कारें भी बरामद की गईं, जिन्हें कथित तौर पर भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में सक्रिय ‘अंडरग्राउंड ग्रुप्स’ को बेचने के लिए ले जाया गया था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहिणी निवासी अमित नागर उर्फ सोनू (35), इंफाल ईस्ट निवासी एटम जगत सिंह (45) और पोटसंगबम मुकेश सिंह (28) के रूप में हुई है। पुलिस ने अमित नागर को गिरोह का सरगना बताया है। मामले में संगठित आपराधिक गतिविधियों के मद्देनजर MCOC Act की धारा 3 जोड़ी गई है।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, जांच के दौरान पांच चोरी की कारें, डुप्लीकेट चाबियां, 104 फर्जी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट, 24 फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, मोबाइल फोन और एक प्री-एक्टिवेटेड सिम कार्ड बरामद किया गया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में अमित नागर ने विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रिसीवरों को 100 से अधिक चोरी की हाई-एंड कारें सप्लाई करने की बात बताई।

पुलिस ने वाहन चोरी की घटनाओं के CCTV फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। 12 मई को छतरपुर एन्क्लेव फेज-II से मुकेश सिंह को पकड़ा गया। उसके किराए के परिसर से फर्जी नंबर प्लेट, RC और नंबर प्लेट लगाने में इस्तेमाल उपकरण बरामद किए गए। उसकी निशानदेही पर वजीराबाद गांव से चोरी की मारुति बलेनो बरामद हुई।

14 मई को एटम जगत सिंह को मजनू का टीला से पकड़ा गया और बाद में मुखर्जी नगर से चोरी की मारुति स्विफ्ट बरामद की गई। अमित नागर को 28 जुलाई को गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही पर चोरी की मारुति स्विफ्ट डिजायर बरामद हुई।

जांच के दौरान 13 अगस्त को एटम जगत सिंह की निशानदेही पर मणिपुर के उखरुल जिले से एक Kia Seltos और Hyundai Creta बरामद की गईं। पुलिस के अनुसार, दोनों वाहन दिल्ली से चोरी हुए थे और उन्हें आगे बेचने के लिए उखरुल क्षेत्र ले जाया गया था। जांच में दावा किया गया कि इन वाहनों को भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में सक्रिय अंडरग्राउंड ग्रुप्स को बेचने की योजना थी।

पुलिस के मुताबिक, सिंडिकेट में वाहन चोरी, परिवहन, फर्जी दस्तावेज और नंबर प्लेट तैयार करने तथा चोरी के वाहनों की बिक्री के लिए अलग-अलग सदस्य काम करते थे। नेटवर्क के तार मणिपुर के अलावा राजस्थान, पंजाब, असम और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों तक फैले होने की बात सामने आई है।

पुलिस ने कहा कि वाहन चुराने वाले सदस्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कंप्यूटर आधारित स्कैनिंग डिवाइस का इस्तेमाल कर वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल मॉड्यूल को बायपास या हैक करते और डुप्लीकेट चाबियां तैयार करते थे। गिरोह मुख्य रूप से कारों, SUV और महंगे वाहनों को निशाना बनाता था।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में एटम जगत सिंह ने बताया कि वह अमित नागर से चोरी के वाहन करीब 1.5 लाख से 2 लाख रुपये में खरीदता और प्रति वाहन लगभग 40,000 से 50,000 रुपये के मुनाफे पर आगे बेचता था। गिरोह के सदस्य कथित तौर पर पुलिस से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और प्री-एक्टिवेटेड या फर्जी पहचान आधारित सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे।

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, अमित नागर की वाहन चोरी, आर्म्स एक्ट और अन्य अपराधों से जुड़े 38 मामलों में पूर्व संलिप्तता है, जबकि एटम जगत सिंह की तीन वाहन चोरी के मामलों में पूर्व संलिप्तता बताई गई है। अन्य सदस्यों और चोरी के वाहनों का पता लगाने तथा पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की पहचान के लिए जांच जारी है।

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