नई दिल्ली: दिल्ली के विंटर एक्शन प्लान 2026–27 में प्रदूषण रोकने के लिए प्रवर्तन और सड़क की धूल पर नियंत्रण को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने योजना में 334 प्रवर्तन टीमों, 98 मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों और 3,000 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास के लक्ष्य की जानकारी दी है।
दिल्ली विंटर एक्शन प्लान के दस प्रमुख उपाय वाहनों, निर्माण, उद्योगों, खुले में कचरा जलाने, सार्वजनिक परिवहन और सड़क सफाई से जुड़े हैं। CMO की 9 अक्टूबर की घोषणा में 37 वायु गुणवत्ता एवं ट्रैफिक हॉटस्पॉट, सुगम यातायात के लिए 15 प्रमुख कॉरिडोर और निगरानी के लिए AI-सक्षम कमांड एवं कंट्रोल सेंटर का भी उल्लेख है।
योजना में कौन से दस उपाय हैं
CMO के ग्राफिक्स में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं होने पर वाहन को ईंधन नहीं देना, BS-VI से नीचे के बाहरी वाहनों का प्रवेश रोकना, चरणबद्ध निर्माण प्रतिबंध, उद्योगों की सख्त जांच और खुले में जलाने पर रोक जैसे उपाय दिए गए हैं।
अन्य पांच उपायों में सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता, 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम, पार्किंग शुल्क दोगुना करना, सड़कों का पुनर्विकास और गहरी एवं मशीनों से सड़क सफाई शामिल है। ये घोषित शीतकालीन योजना के हिस्से हैं; संबंधित उपाय लागू होने पर यात्रियों और कार्यस्थलों को प्रभावी संचालन आदेशों का पालन करना होगा।
निर्माण स्थलों की नियमित और औचक जांच
दिल्ली सरकार ने 9 अक्टूबर की एक अन्य जानकारी में बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति सरकारी और निजी निर्माण स्थलों की नियमित तथा औचक जांच कर रही है। पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढकना, एंटी-स्मॉग गन और धूल रोकने के अन्य उपाय जरूरी हैं। उल्लंघन पर निर्माण कार्य रोका जा सकता है और नियमों के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने लोगों से PUC प्रमाणपत्र वैध रखने, सार्वजनिक परिवहन या कारपूल अपनाने, खुले में कचरा नहीं जलाने, धूल और कचरे को नियंत्रित करने, हरित क्षेत्र की रक्षा करने और ग्रीन दिल्ली ऐप पर प्रदूषण की शिकायत देने की अपील की है।

