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आयकर विभाग ने संदिग्ध विदेशी धन प्रेषण की देशव्यापी जांच शुरू की; 394 संस्थाएं और 36 पेशेवर दायरे में

नई दिल्ली, 18 अगस्त: आयकर विभाग ने संदिग्ध विदेशी धन प्रेषण की देशव्यापी जांच शुरू की है, जिसके दायरे में लगभग 394 संस्थाएं और 36 पेशेवर आए हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इनमें देश की भूमि सीमा से लगे राज्यों में स्थित 117 संस्थाएं भी शामिल हैं।

18 अगस्त को शुरू की गई यह कार्रवाई जमीनी खुफिया जानकारी और विदेश भेजी गई धनराशि से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण के बाद की गई। इस प्रक्रिया में कई संदिग्ध संस्थाओं की पहचान हुई, जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा विदेश भेजी थी।

विभाग के अनुसार, फर्जी दान और योगदान के बदले एंट्री उपलब्ध कराने में कथित रूप से शामिल काल्पनिक धर्मार्थ ट्रस्टों के एक समूह पर तलाशी अभियान के दौरान विदेश में धन भेजने वाली संस्थाओं के देशव्यापी नेटवर्क का पता चला।

प्रारंभिक जमीनी सत्यापन में पाया गया कि धन भेजने वाली संस्थाएं या तो आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर रही थीं या बहुत कम कारोबार दिखाते हुए रिटर्न दाखिल कर रही थीं। विभाग ने कहा कि दिखाए गए कारोबार और विदेश भेजी गई बड़ी धनराशि के बीच कोई स्पष्ट संबंध नजर नहीं आया। विदेश भेजी गई रकम भी उसके बताए गए उद्देश्यों, जैसे माल ढुलाई का भुगतान तथा सॉफ्टवेयर या परामर्श सेवाओं के आयात, से मेल खाती नहीं दिखी।

विभाग के मुताबिक, जमीनी स्तर पर जुटाई गई अतिरिक्त जानकारी से यह भी सामने आया कि ये संस्थाएं अपने घोषित पतों से वास्तव में काम नहीं कर रही थीं।

आंकड़ों के आगे के विश्लेषण में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र अपेक्षाकृत छोटे समूह के पेशेवरों द्वारा जारी किए गए थे, जबकि विदेश भेजी गई धनराशि कुछ चुनिंदा संस्थाओं के समूह को प्राप्त हुई थी।

विभाग ने कहा कि आयकर नियम, 1962 के नियम 37BB के साथ पढ़े जाने वाले फॉर्म 15CB, जो आयकर नियम, 2026 के नियम 220 के साथ पढ़े जाने वाले फॉर्म 146 के अनुरूप है, के तहत विदेशी धन प्रेषण को प्रमाणित करने वाले अकाउंटेंट को खातों की पुस्तकों और अन्य संबंधित दस्तावेजों के आधार पर उसकी कर देयता की जांच करनी होती है। सामने आए तथ्यों ने इस बात को लेकर चिंता पैदा की है कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले पर्याप्त जांच-पड़ताल की गई थी या नहीं।

देशव्यापी सत्यापन अभियान में शेल संस्थाओं, उनके पीछे के व्यक्तियों और फॉर्म 15CB प्रमाणपत्र जारी करने वाले पेशेवरों की जांच की जा रही है। भारत की भूमि सीमा से लगे जिलों में स्थित और विदेश में बड़ी रकम भेजने वाली संस्थाओं को भी इस कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।

आयकर विभाग ने कहा कि फॉर्म 15CB/फॉर्म 146 प्रमाणपत्र जारी करने वाले अकाउंटेंट से उचित सावधानी, परिश्रम और पेशेवर विवेक बरतने तथा धन प्रेषण को प्रमाणित करने से पहले संबंधित लेनदेन और तथ्यों की समुचित जांच करने की अपेक्षा की जाती है।

मामले में आगे की जांच जारी है।

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