नागपुर: आर्थिक प्रगति के साथ नागरिक जिम्मेदारी, अनुशासन और चरित्र का विकास भी जरूरी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संजय गुप्ता ने कहा कि समाज और देश के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव के बिना समृद्धि अधूरी रह जाएगी।
20 अक्टूबर को दिए संबोधन में गुप्ता ने कहा कि प्रगति का क्रम अनुकूल रहा तो भारत अगले 20–25 वर्षों में समृद्ध राष्ट्र बन सकता है। हालांकि उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बढ़ती संपन्नता के साथ लोगों की सोच, सहिष्णुता और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता में भी वैसा ही सुधार होगा।
आर्थिक विकास के साथ रोजमर्रा की जिम्मेदारी
गुप्ता ने जाति, वर्ग, पंथ और धर्म के आधार पर विभाजन को समाज की जारी चुनौतियों में गिना। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता होने के बावजूद बहुत से नागरिकों में नैतिकता, जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन बेहतर बनाने वाले नियमों की पर्याप्त समझ विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने आग्रह किया कि लोग केवल यह न सोचें कि व्यवस्था उन्हें क्या दे रही है, बल्कि यह भी देखें कि वे देश को क्या योगदान दे सकते हैं। उनके अनुसार राष्ट्रीय प्रगति को बेहतर सामाजिक जीवन में बदलने के लिए अनुशासन और नागरिक दायित्वों का सम्मान जरूरी है।
गुप्ता ने संघ की अगली शताब्दी में चरित्र निर्माण को प्रमुख कार्य बताया। उन्होंने अच्छे चरित्र को कर्तव्य की समझ और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़ा तथा सामाजिक सुधार को निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया।
जागरण की सात प्राथमिकताएं और संघ से वैचारिक जुड़ाव
मीडिया की भूमिका पर गुप्ता ने कहा कि दैनिक जागरण की जिम्मेदारी पाठकों को उनके कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाए रखने की भी है। उन्होंने अखबार के संपादकीय दृष्टिकोण को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, राष्ट्र के प्रति समर्पण, सामाजिक समरसता और सद्भाव से जुड़ा बताया।
उन्होंने जागरण के सात सरोकार गिनाए: सुशिक्षित समाज, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वस्थ समाज, महिला सशक्तीकरण, गरीबी उन्मूलन और जनसंख्या नियोजन। उनके अनुसार समूह इन क्षेत्रों के जरिए सामाजिक और राष्ट्रीय विकास में योगदान देने का प्रयास करता है।
गुप्ता ने भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता के मामले में जागरण और संघ के विचारों को समान बताया। उन्होंने इन सामाजिक प्राथमिकताओं को नागरिकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की संस्थागत जिम्मेदारी से जोड़ा।
भाजपा की सफलता के पीछे संघ की भूमिका बताई
संबोधन के राजनीतिक हिस्से में गुप्ता ने भाजपा की सफलता का श्रेय संघ की वैचारिक नींव और संगठनात्मक मजबूती को दिया। उन्होंने जनसंघ से भाजपा तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी के अनेक नेताओं का दृष्टिकोण संघ से प्रभावित रहा है।
उन्होंने जिसे तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति कहा, उसकी आलोचना करते हुए तर्क दिया कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं सामाजिक सुधार में बाधा बन सकती हैं। ये राजनीतिक व्यवस्था और संघ की भूमिका को लेकर उनके आकलन थे, किसी सरकारी नीति की घोषणा नहीं।
संघ और उससे जुड़े संगठनों पर हिन्दू उग्रवाद को बढ़ावा देने के आरोपों का विरोध करते हुए उन्होंने RSS को हिन्दू मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण की शक्ति बताया। उन्होंने इन परंपराओं के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव में संघ के योगदान को महत्वपूर्ण माना।
अगली शताब्दी में सामाजिक एकजुटता की चुनौती
गुप्ता ने संघ की स्थापना के उद्देश्यों में हिन्दू समाज को संगठित करना, आत्मबोध मजबूत करना और पराधीनता की मानसिकता से उबरना बताया। उनके अनुसार स्वतंत्रता के बाद संघ ने राष्ट्रीय प्रतिबद्धता वाले व्यक्तियों के निर्माण पर ध्यान दिया।
उन्होंने जातिगत भेदों से हिन्दू समाज के और बंटने की आशंका जताई तथा निस्वार्थ सेवा में लगे संस्थानों की जरूरत पर जोर दिया। संबोधन के समापन में उन्होंने कहा कि उनकी परिकल्पना के राष्ट्रीय आदर्श को हासिल करने के लिए भौतिक प्रगति के साथ चरित्र निर्माण भी आवश्यक है।
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