9 महीनों में ₹13 करोड़ का विज्ञापन खर्च: Rekha Gupta सरकार पर ‘ब्रांडिंग’ का आरोप

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नई दिल्ली: दिल्ली की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब विधानसभा में खुलासा हुआ कि दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 के बीच महज़ 9 महीनों में विज्ञापनों पर ₹12.97 करोड़ खर्च किए। यह जानकारी AAP विधायक प्रेम कुमार चौहान के सवाल के जवाब में सरकार ने सदन के पटल पर रखी।

इस खुलासे के बाद विपक्ष ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि खुद को बचत और कुशल प्रबंधन की सरकार बताने वाली सरकार ने जनता के टैक्स के पैसे से बड़े पैमाने पर राजनीतिक प्रचार किया।

विज्ञापन खर्च का पूरा ब्योरा

विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, कुल ₹12.97 करोड़ के विज्ञापन खर्च में से बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री की ब्रांडिंग से जुड़े अभियानों पर गया।

  • मुख्यमंत्री की ब्रांडिंग/फोटो वाले विज्ञापन:
    करीब ₹6.90 करोड़ ऐसे विज्ञापनों पर खर्च किए गए जिनमें मुख्यमंत्री की तस्वीर या व्यक्तिगत ब्रांडिंग प्रमुख थी।
  • माध्यम-वार खर्च:
    • प्रिंट मीडिया (अख़बार): ₹10.05 करोड़ से अधिक
    • इलेक्ट्रॉनिक मीडिया (टीवी/न्यूज़ चैनल): ₹1.61 करोड़
    • डिजिटल मीडिया (वेबसाइट/सोशल मीडिया): ₹52.28 लाख
    • आउटडोर मीडिया (होर्डिंग, बस शेल्टर, मेट्रो): ₹75,100
    • रेडियो विज्ञापन: ₹33,000

बजट और पारदर्शिता पर सवाल

विपक्ष ने यह मुद्दा भी उठाया कि इस भारी खर्च के लिए वित्त विभाग से कोई अलग बजटीय मंज़ूरी नहीं ली गई। बताया गया कि यह राशि मौजूदा विभागीय बजट से ही निकाली गई, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं।

इसके अलावा, विपक्ष का दावा है कि करीब ₹3 करोड़ के विज्ञापन दिल्ली के बाहर अन्य राज्यों में प्रकाशित किए गए, जिसे जनता के पैसे की बर्बादी बताया जा रहा है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह धन स्कूलों, अस्पतालों और विकास कार्यों पर खर्च होना चाहिए था, न कि सरकार की छवि चमकाने में। पार्टी नेताओं ने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पहले की सरकारों पर भी फिजूलखर्ची के आरोप लगाती रही हैं।

अब जब यह आंकड़े आधिकारिक तौर पर विधानसभा रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुके हैं, तो सरकार पर विज्ञापन खर्च की ज़रूरत, उद्देश्य और औचित्य को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

आगे क्या?

इस खुलासे ने दिल्ली में सरकारी विज्ञापन नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में जवाबदेही, पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर यह मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहने की संभावना है।

Also Read: Delhi Advertisement Spend Row: Rekha Gupta Govt Spent ₹12.97 Crore in 9 Months, Over Half on CM Branding


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