नई दिल्ली: वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाकर उनका मनोबल गिराना और फिर उनके अधीन काम करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रभावित करना—ACP अर्शदीप सिंह पंवार ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाए जाने के पीछे एक कथित रणनीति का यह विवरण दिया है।
दिल्ली पुलिस की ओर से जारी वीडियो में नई दिल्ली के चाणक्यपुरी के ACP पंवार कहते हैं कि प्रसारित हो रहे वीडियो और रील्स में वरिष्ठ पुरुष अधिकारियों पर केंद्रित हमलों का असर केवल संबंधित अधिकारी तक सीमित नहीं रहता।
सेनापति और सेना का उदाहरण
पंवार की व्याख्या पुलिस नेतृत्व और मौके पर तैनात कर्मियों के बीच संबंध पर केंद्रित है। उनका आरोप है कि वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाकर प्रदर्शन संभालने के दौरान उन्हें हतोत्साहित किया जा सकता है, जिसका असर उनके अधीनस्थ कर्मचारियों तक पहुंच सकता है।
वह अपनी बात समझाने के लिए युद्धक्षेत्र का उदाहरण देते हैं: सेनापति को घायल कर दिया जाए तो उसके पीछे की सेना भी कमजोर पड़ सकती है। उनके अनुसार, किसी कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले अधिकारी का मनोबल तोड़ने से कार्रवाई कर रहे पूरे बल पर असर पड़ सकता है।
रील में उनके बयान के साथ घनी भीड़ के बीच वर्दीधारी अधिकारियों, उठे हुए मोबाइल फोन और आमने-सामने की तनातनी के दृश्य दिखाए गए हैं। ये दृश्य उनके तर्क की पृष्ठभूमि बताते हैं; प्रदर्शनकारियों के उद्देश्य को लेकर दावा पंवार का है।
उनके पास अधिकार, हमारे पास कर्तव्य
पंवार कहते हैं कि आरोपों या निशाना बनाए जाने के बावजूद पुलिस अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेगी। संविधान की शपथ का उल्लेख करते हुए वह कहते हैं कि अधिकारी उसका पालन करेंगे।
वह प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को स्वीकार करते हैं, लेकिन आरोप लगाते हैं कि उन अधिकारों का दुरुपयोग हो रहा है। उनके अनुसार, इसके बावजूद पुलिस को अपने कर्तव्य पूरे तन-मन से निभाने होंगे।
दिल्ली पुलिस ने रील के साथ एकजुटता का संदेश दिया: सभी एक के लिए और एक सभी के लिए।
पंवार के विवरण का मुख्य तर्क यह है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी पर बनाया गया दबाव पूरी तैनाती को प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि पुलिस को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाते हुए इस दबाव का सामना करना चाहिए।

