नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने घोंडा के गोदामों और नांगलोई के अमन पुरी में कथित अवैध निर्माण व पैकेजिंग इकाई पर छापे मारकर नकली ENO और FeviKwik के नेटवर्क का भंडाफोड़ करने तथा दो लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया है।
पुलिस के अनुसार 1,97,856 पैक किए गए कथित नकली ENO सैशे और अलग से 310 किलो से अधिक खुले भरे हुए सैशे बरामद हुए। खुले सैशों की संख्या पुलिस ने करीब चार लाख बताई है। इसके अलावा 1,12,560 नकली FeviKwik सैशे, लगभग 200 किलो कच्चा माल और चालू Form, Fill and Seal (FFS) मशीन जब्त करने की जानकारी दी गई है।


घोंडा के गोदाम और नांगलोई की इकाई पर छापे
19 अक्टूबर की विज्ञप्ति में पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नवीन सिंघल, 51, और बलराज बंसल, 45, के रूप में की है। कार्रवाई 17 और 18 अक्टूबर को घोंडा तथा नांगलोई के ठिकानों पर हुई। आपूर्ति शृंखला की जांच के लिए दोनों को पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया गया।
पुलिस के मुताबिक ब्रांड-सुरक्षा प्रतिनिधियों की मौजूदगी में घोंडा के दो गोदामों की तलाशी ली गई। नांगलोई के अमन पुरी में कथित अवैध इकाई पर बिजली से चलने वाली FFS मशीन नकली पाउडर पैक करते मिली।
स्टिकर, पैकिंग रोल और दूसरे ब्रांडों की सामग्री मिली
पैक किए गए ENO सैशे 229 कार्टन में थे। पुलिस ने अलग से तीन लाख से अधिक ENO स्टिकर, करीब 100 किलो ENO पैकिंग रोल और बड़ी संख्या में डिब्बे व कार्टन बरामद करने की जानकारी दी है।
विज्ञप्ति के अनुसार FeviKwik के 67 कार्टन में प्रत्येक में 1,680 सैशे थे। दो लाख से अधिक FeviKwik इकाइयों की पैकिंग सामग्री और MDH मसाला समेत अन्य ब्रांडों के नाम वाली पैकेजिंग भी मिली। पैकेजिंग मिलने को तैयार MDH खाद्य उत्पादों की बरामदगी नहीं बताया गया है।
कच्चे माल को पुलिस ने साइट्रिक एसिड बताया है। इसमें 25-25 किलो के छह बोरे तथा अतिरिक्त स्टॉक मिलाकर कुल मात्रा लगभग 200 किलो बताई गई है। हीट-सीलिंग गन भी बरामद उपकरणों में शामिल हैं।
आपूर्ति शृंखला की जांच जारी
ARSC की टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी ने एसीपी विवेकानंद पाठक की निगरानी में किया। क्राइम ब्रांच थाने में भारतीय न्याय संहिता और कॉपीराइट अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस का आरोप है कि नेटवर्क स्थापित कंपनियों के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल कर नकली सामान बेच रहा था, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को जोखिम और ब्रांड मालिकों को नुकसान था। डीसीपी क्राइम संजीव कुमार यादव के हस्ताक्षर वाली विज्ञप्ति के अनुसार कच्चे माल के स्रोत, आगे सामान लेने वाले लोगों, वितरकों और अन्य कथित सहयोगियों की पहचान की जा रही है।

