नई दिल्ली: गोयला डेयरी की नई बायोगैस परियोजना के तहत डेयरी संचालकों से 67 पैसे प्रति किलो की दर से गोबर खरीदा जाएगा। एमसीडी के अनुसार संयंत्र में रोज 200 मीट्रिक टन गोबर के प्रसंस्करण की क्षमता है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 19 अक्टूबर को नजफगढ़ क्षेत्र में ₹16 करोड़ की लागत से तैयार संयंत्र का उद्घाटन किया। निगम के अनुसार इसका उद्देश्य गोबर को नालों में जाने से रोकना, स्वच्छ ईंधन बनाना और यमुना तक पहुंचने वाला प्रदूषण कम करना है।
आईजीएल को पाइपलाइन से दी जाएगी गैस
संयंत्र से प्रतिदिन लगभग 14,000 घन मीटर कच्ची बायोगैस और करीब 5.6 टन शुद्ध संपीड़ित बायोगैस बनने की अपेक्षा है। संपीड़ित बायोगैस पाइपलाइन के जरिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को दी जाएगी।
ये विज्ञप्ति में बताए गए अपेक्षित उत्पादन के आंकड़े हैं, रोजाना के सत्यापित उत्पादन के नहीं। प्रसंस्करण के बाद बची स्लरी का उपयोग जैविक खाद के रूप में किया जाएगा।
निर्धारित संग्रह व्यवस्था अपनाने की अपील
परियोजना की एजेंसी डेयरी संचालकों से 67 पैसे किलो गोबर एकत्र करेगी। एमसीडी के अनुसार गोयला डेयरी क्षेत्र में रोज लगभग 200 मीट्रिक टन गोबर निकलता है।
गुप्ता ने डेयरी संचालकों और निवासियों से गोबर नालों में बहाने के बजाय निर्धारित संग्रह व्यवस्था अपनाने को कहा। अधिकारियों और संयंत्र संचालकों को नियमित संग्रह, सुरक्षित प्रसंस्करण और सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
छह और संयंत्रों पर काम का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि 18 महीने में तीन बायोगैस संयंत्र चालू किए गए और छह अन्य पर काम चल रहा है। उनके अनुसार नंगली सकरावती संयंत्र में एक साल में 55,000 टन गोबर का प्रसंस्करण हुआ और किसानों को ₹3.5 करोड़ दिए गए।
उन्होंने दिल्ली की डेयरी कॉलोनियों में नालों और जलनिकासी सुधार के लिए ₹50 करोड़ के आवंटन की भी जानकारी दी। गुप्ता ने कहा कि यमुना की सफाई के लिए प्रदूषण को उसके स्रोत पर रोकना जरूरी है।
उद्घाटन में कैबिनेट मंत्री आशीष सूद और महापौर प्रवेश वाही उपस्थित थे। वाही ने कहा कि दिल्ली सरकार ने परियोजना के लिए आर्थिक सहायता और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं।

