नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने औषधि नियम, 1945 में संशोधन कर दवाओं के आयात से जुड़े प्रावधान में एक साल की शेष शेल्फ लाइफ की शर्त रखी है। जैविक दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए अलग प्रावधान है, जिसके तहत लेबल पर दर्ज कुल शेल्फ लाइफ का 60 प्रतिशत शेष रहने पर अनुमति दी जा सकती है।
नियम 31 के संशोधित दूसरे परंतुक के अनुसार, लाइसेंसिंग प्राधिकारी ऐसी दवा के आयात की अनुमति नहीं देगा जिसकी आयात की तारीख को शेष शेल्फ लाइफ एक साल से कम हो। इसी प्रावधान में जैविक दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए लेबल पर दर्ज शेल्फ लाइफ का 60 प्रतिशत शेष रहने की व्यवस्था दी गई है।

आयात की तारीख पर आंकी जाएगी शेष शेल्फ लाइफ
इनका नाम औषधि (तेरहवां संशोधन) नियम, 2026 है। अधिसूचना 16 अक्टूबर की है और 28 अक्टूबर की तारीख वाले राजपत्र अंक में प्रकाशित है। नियमों के अनुसार, वे आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।
मंत्रालय ने कहा कि प्रारूप संशोधन पर मिली सार्वजनिक आपत्तियों और सुझावों पर विचार तथा औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड से परामर्श के बाद बदलाव को अंतिम रूप दिया गया। जैविक दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स के लिए दी गई व्यवस्था बिना शर्त छूट नहीं है।
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