नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने राजधानी में अवैध प्रवासियों को फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर आधार कार्ड जारी होने की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने दिल्ली के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आधार नामांकन प्रणाली में व्यापक सुधार लागू करने और दो महीने के भीतर सभी केंद्रों को इन-हाउस मॉडल पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं।
उपराज्यपाल ने बताया कि कई अवैध प्रवासी झूठे दस्तावेजों और गलत जानकारी के जरिए आधार कार्ड हासिल कर रहे हैं, जिससे वे पासपोर्ट, वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेज़ भी प्राप्त कर लेते हैं। इसके जरिए वे केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं और स्थानीय रोजगार बाजार को प्रभावित करते हैं।
सक्सेना ने कहा कि:
- UIDAI द्वारा 14 अक्टूबर 2022 को जारी निर्देशों के बावजूद, दिल्ली के कई नामांकन केंद्र आज भी थर्ड पार्टी एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे हैं।
- उन्होंने सभी रजिस्ट्रारों को दो महीने के भीतर इन-हाउस मॉडल को लागू करने और UIDAI के 2016 के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं।
- राज्य सरकार को 15 जुलाई 2025 तक सभी नामांकन केंद्रों की सूची के साथ वर्तमान कार्यप्रणाली की पूरी जानकारी जमा करने को कहा गया है।
- सभी ऑपरेटरों को रजिस्ट्रार के रोल पर नियुक्त करने या केवल अधिकृत मानव संसाधन एजेंसी के माध्यम से नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है।
- प्रत्येक महीने डिविजनल कमिश्नर की निगरानी में ऑडिट अनिवार्य किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की चूक न हो।
पत्र में कहा गया है कि जो कर्मचारी या ऑपरेटर अवैध प्रवासियों को नामांकित करने में लिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश माननीय उपराज्यपाल की मंजूरी के साथ जारी किया गया है और इसका उद्देश्य आधार प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है।