बेंगलुरु: जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय (DGGI) की बेंगलुरु इकाई ने ₹266 करोड़ के फर्जी बिलिंग घोटाले और ₹48 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है, जिसमें दिल्ली की कई शेल कंपनियों की भूमिका सामने आई है। वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इस संबंध में आधिकारिक जानकारी साझा की।
खुफिया जानकारी के आधार पर डीजीजीआई अधिकारियों ने दिल्ली में कई स्थानों पर छापेमारी कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि छह शेल कंपनियां बिना किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के फर्जी चालान बनाकर आईटीसी का गलत लाभ ले रही थीं और सर्कुलर ट्रांजेक्शन्स के जरिए इस घोटाले को अंजाम दे रही थीं।
इस मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को मुख्य आरोपी के रूप में पहचाना गया है, जो इन शेल कंपनियों का निदेशक भी था। उसके कार्यालय से फर्जी चालान, नकली दस्तावेज, लैटरहेड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। उसे हिरासत में ले लिया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस घोटाले में लेयरिंग तकनीक के जरिए लेनदेन को छिपाकर फर्जी आईटीसी दावा किया गया ताकि जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके। इनमें से कुछ कंपनियों का संबंध सूचीबद्ध कंपनियों से होने का संदेह है, जिससे निवेशकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
डीजीजीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट सेबी (SEBI) को भेज दी है और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत भी कार्रवाई की सिफारिश की है। यह मामला अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच का कारण भी बन सकता है।
जांच अब भी जारी है और अधिकारियों ने अन्य वित्तीय मध्यस्थों व पेशेवरों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है, जो इस फर्जीवाड़े में शामिल हो सकते हैं। जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।