नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बंगले को लेकर जारी सियासी विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि सरकारी बंगले की बंटवारा राजनीति तुरंत बंद होनी चाहिए और आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
मामला तब शुरू हुआ जब लोधी एस्टेट का एक बंगला महीनों पहले खाली हुआ था। आम आदमी पार्टी (AAP) ने मांग की कि इसे अरविंद केजरीवाल को आवंटित किया जाए। लेकिन केंद्र ने कहा कि वेटिंग लिस्ट लंबी है और प्रक्रिया में समय लगेगा। बाद में यह बंगला किसी और नेता को दे दिया गया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
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सुनवाई के दौरान जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्र से सवाल किया कि “जब 26 अगस्त से पहले बंगला खाली था तो इसे किसी और को किस आधार पर आवंटित किया गया? वेटिंग लिस्ट और नियम दिखाइए और बताइए कि प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं है?”
इस मामले के राजनीतिक मायने भी गहरे हैं। जहां AAP का आरोप है कि केंद्र राजनीतिक बदले की भावना से बंगला देने में देरी कर रहा है, वहीं केंद्र का कहना है कि नियम सबके लिए समान हैं और किसी को भी विशेष छूट नहीं दी जाएगी। हाईकोर्ट ने हालांकि साफ किया कि कागजों पर नहीं, बल्कि व्यवहार में पारदर्शिता दिखनी चाहिए।
अब केंद्र सरकार को 18 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केजरीवाल को बंगला मिलेगा या यह विवाद और बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा करेगा। इतना तय है कि दिल्ली की राजनीति में अब सरकारी बंगला सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि सत्ता और साख का प्रतीक बन चुका है।

