नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी का आरोप है कि राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के बावजूद केंद्र सरकार ने पार्टी संयोजक और राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल को नियमों के अनुसार मिलने वाला सरकारी बंगला आवंटित नहीं किया।
AAP नेताओं ने कहा कि 2014 के नियमों और गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष को दिल्ली में सरकारी आवास दिया जाना अनिवार्य है। AAP को 2023 में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला और उसी वर्ष अप्रैल में औपचारिक आवेदन भी किया गया था।
लेकिन, पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर आवंटन रोके रखा। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी को बंगला अलॉट किया जा सकता है तो राष्ट्रीय पार्टी प्रमुख को क्यों नहीं? अदालत ने स्पष्ट किया कि आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी है और केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों को तलब कर जवाब मांगा।
AAP का कहना है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई गैर-राष्ट्रीय पार्टी नेताओं को भी बंगले आवंटित किए गए हैं, जबकि AAP जैसे मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल को अपने अध्यक्ष के लिए आवास पाने के लिए अदालत जाना पड़ा।
“माननीय अदालत ने साफ कहा है कि रिकॉर्ड पर बताइए कि किन आधार पर आवंटन नहीं हुआ। यह कोई सुविधा नहीं बल्कि कानून के तहत अधिकार है। न्याय में देरी का मतलब अधिकार से वंचित करना नहीं होना चाहिए,” AAP की ओर से दलील दी गई।
पार्टी नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार केजरीवाल और AAP को परेशान करने की कोशिश कर रही है, कभी जांच एजेंसियों से तो कभी प्रशासनिक अड़चनों से। अब बंगला आवंटन रोकना भी उसी सिलसिले की कड़ी है।
हाईकोर्ट मामले की सुनवाई जारी रखेगा, लेकिन अदालत की कड़ी टिप्पणियों ने AAP बनाम केंद्र की सियासी लड़ाई को और तेज कर दिया है। यह मुद्दा आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति में बड़ा बवाल खड़ा कर सकता है।

