नई दिल्ली: दिल्ली के पॉश इलाके शालीमार बाग में आम आदमी पार्टी (AAP) की सक्रिय नेता रचना यादव की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज वारदात ने न केवल इलाके में दहशत फैला दी, बल्कि दिल्ली की कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, रचना यादव अपने घर के पास मौजूद थीं, तभी बाइक सवार बदमाशों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। एक गोली सीधे उनके सिर में लगी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी बेखौफ होकर फरार हो गए।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह कोई सामान्य हमला नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश हो सकती है। गौरतलब है कि रचना यादव के पति विजेंद्र यादव की 2023 में हत्या कर दी गई थी और रचना यादव उस मामले में मुख्य गवाह थीं। परिवार का आरोप है कि उस केस का मुख्य आरोपी भारत यादव, जो फिलहाल जेल में बंद है, रचना यादव को लगातार जान से मारने की धमकियां दे रहा था।
रचना यादव की बेटियों ने दावा किया कि उन्होंने कई बार पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई, लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब इस हत्या ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समय रहते कार्रवाई होती तो इस वारदात को रोका जा सकता था?
इस हत्याकांड के बाद आम आदमी पार्टी ने BJP और दिल्ली के LG पर सीधा हमला बोला है। पार्टी संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “दिल्ली में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। मुख्यमंत्री की अपनी विधानसभा में हुई यह हत्या भाजपा सरकार की विफलता का सबूत है।” उन्होंने रचना यादव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि जब मुख्यमंत्री के आवास से महज 400 मीटर की दूरी पर दिनदहाड़े हत्या हो सकती है, तो आम नागरिक खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करेगा। उन्होंने मौजूदा हालात को “चार-इंजन वाली भाजपा सरकार की कानून-व्यवस्था की नाकामी” बताया।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए 12 विशेष टीमें गठित की हैं और आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हालांकि, इस हत्याकांड ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या दिल्ली में गवाहों की सुरक्षा वाकई सुनिश्चित है, या अपराधी बेखौफ हो चुके हैं?

