नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आदेश दिया है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC) में बीते 20 वर्षों के सभी 1 करोड़ रुपये से अधिक के आर्बिट्रेशन मामलों की समीक्षा की जाएगी।
इसके लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (PWD/I&FC) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति उन मामलों की जांच करेगी जिनमें पूर्ववर्ती सरकारों के खिलाफ निर्णय दिए गए, भुगतान की राशि तय हुई और जनता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
लोक निर्माण विभाग (PWD) और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (I&FC) में पिछले 20 वर्षों के 1 करोड़ रुपये से अधिक के आर्बिट्रेशन मामलों की समीक्षा की जाएगी।
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) August 27, 2025
इसके लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव (PWD/I&FC) की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जो पूर्ववर्ती सरकारों के विरुद्ध दिए गए… pic.twitter.com/xDZCErcVOs
मुख्यमंत्री गुप्ता ने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान बारापुला फेज़-III प्रोजेक्ट में गड़बड़ियों और देरी के कारण दिल्ली को 175 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसे उन्होंने “जनता के पैसों के साथ अन्याय” करार दिया।
भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने तय किया है कि विकास परियोजनाओं से जुड़े अनुबंधों में अब आर्बिट्रेशन की शर्त शामिल नहीं होगी। विवाद की स्थिति में मामला सीधे अदालत में निपटाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा:
“जनता का पैसा केवल जनता के हित में खर्च होगा।” साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि करदाताओं के पैसे की बर्बादी रोकी जा सके और विकास कार्य समय पर पूरे हों।