नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने AAP के पूर्व विधायक प्रकाश जरवाल (Prakash Jarwal) को दोषी ठहराने वाले फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। यह मामला डॉ. राजेंद्र सिंह सुसाइड केस (Dr. Rajendra Singh Suicide Case) से जुड़ा है। अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।
जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने यह नोटिस तब जारी किया जब जरवाल ने राउस एवेन्यू कोर्ट के 28 फरवरी 2024 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उन्हें और उनके सहयोगी कपिल नगर (Kapil Nagar) को IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 34, 120B (साज़िश), 346, 506 (धमकी) और 511 (प्रयास) के तहत दोषी ठहराया गया था। वहीं तीसरे आरोपी हर्ष कुमार जलवाल (Harish Kumar Jalwal) को केवल धारा 506 में दोषी ठहराया गया था, लेकिन उन्हें हाईकोर्ट ने 30 अगस्त 2024 को बरी कर दिया।
यह मामला 18 अप्रैल 2020 का है जब दक्षिणी दिल्ली के दुर्गा विहार इलाके में रहने वाले डॉ. राजेंद्र सिंह ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मौके से पुलिस को दो पन्नों का सुसाइड नोट मिला था, जिसमें डॉ. सिंह ने सीधे तौर पर प्रकाश जरवाल और कपिल नगर को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया था। यही नहीं, जांच में मिली उनकी डायरी में भी लिखा था कि उनके पानी के टैंकर दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) में चलते थे और इन्हीं टैंकरों के लिए जरवाल ने पैसों की मांग की थी।
इस सुसाइड नोट और डायरी को ट्रायल के दौरान मुख्य सबूत के तौर पर पेश किया गया था। अब हाईकोर्ट इन सबूतों की गहन समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि निचली अदालत का फैसला बरकरार रहेगा या उसमें बदलाव होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 3 नवंबर की सुनवाई इस पूरे केस का भविष्य तय करेगी — या तो प्रकाश जरवाल की सज़ा बरकरार रहेगी या उन्हें राहत मिलेगी।

