नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में साल 2026 का पहला बुलडोजर एक्शन देखने को मिला है, जिसने उत्तर प्रदेश के सख्त प्रशासनिक मॉडल की याद दिला दी है। रेखा गुप्ता सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में ही दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अवैध कब्ज़ों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया।
मॉडल टाउन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत रोशनआरा क्लब के पास स्थित आली गांव में दोपहर करीब 12 बजे चार बुलडोजर और दो पोकलेन मशीनों के साथ कार्रवाई शुरू हुई। देखते ही देखते करीब एक दर्जन दुकानें, कई पक्के मकान और 100 से अधिक झुग्गियां जमींदोज कर दी गईं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई परिवार 20–25 वर्षों से यहां रह रहे थे।
पूरी कार्रवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती रही, ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
DDA अधिकारियों का कहना है कि यह ज़मीन कई साल पहले अधिग्रहित की जा चुकी थी, लेकिन भूमाफियाओं ने लोगों को गुमराह कर अवैध प्लॉटिंग की और ज़मीन बेच दी। मामला अदालत तक पहुंचा, जहां करीब तीन महीने पहले ज़मीन खाली कराने के आदेश दिए गए थे।
दिल्ली में GAP-3 प्रतिबंध हटने के बाद, अब इन अदालती आदेशों को ज़मीन पर उतारते हुए यह बुलडोजर कार्रवाई की गई। हालांकि यह कार्रवाई यहीं खत्म नहीं होने वाली है। DDA की टीम ने अब भी कुछ मकानों को 72 घंटे में खाली करने का नोटिस दिया है, जिससे आने वाले दिनों में एक और बुलडोजर एक्शन की संभावना जताई जा रही है।
कार्रवाई के बाद इलाके में रहने वाले लोग सदमे में हैं। प्रभावित परिवारों का दावा है कि उनके पास राशन कार्ड, वोटर आईडी और अन्य सरकारी दस्तावेज़ मौजूद हैं, जो उनके यहां रहने की वैधता दर्शाते हैं। लोगों का आरोप है कि बिना पर्याप्त सूचना और नोटिस के सर्दी के मौसम में उन्हें बेघर कर दिया गया।
एक पीड़ित ने कहा,
“जब निर्माण हो रहा था, तब कार्रवाई होनी चाहिए थी। अब जब लोगों ने अपनी ज़िंदगी की जमा पूंजी लगा दी, तब बुलडोजर चलाना क्या इंसाफ है?”
दिल्ली में इस कार्रवाई के बाद बुलडोजर राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। जहां एक ओर प्रशासन इसे अदालती आदेशों का पालन बता रहा है, वहीं दूसरी ओर मानवीय पहलू को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

