नई दिल्ली: दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में अवैध भूजल दोहन का एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां 536 होटलों द्वारा 11 वर्षों तक बिना अनुमति बोरवेल चलाए जाने का खुलासा हुआ है। इस अवैध गतिविधि से न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा, बल्कि सरकार को भी करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
National Green Tribunal के सख्त निर्देशों के बाद दिल्ली सरकार ने इन होटलों पर कुल ₹22.46 करोड़ का जुर्माना लगाया है। एनजीटी में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 से 2024 के बीच इन होटलों ने बिना किसी वैधानिक अनुमति के भूजल का दोहन किया, जिससे सरकार को अनुमानित ₹11 करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि जुर्माने की राशि में से ₹4.36 करोड़ की वसूली हो चुकी है, जबकि शेष ₹18.12 करोड़ की वसूली की प्रक्रिया जारी है।
DJB के 9 वरिष्ठ इंजीनियर दोषी
रिपोर्ट में Delhi Jal Board के 9 वरिष्ठ इंजीनियरों को गंभीर लापरवाही का दोषी ठहराया गया है। मुख्य सचिव की रिपोर्ट के मुताबिक, इन अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण अवैध बोरवेल संचालन एक दशक से अधिक समय तक जारी रहा। हालांकि दुर्भावनापूर्ण मंशा के प्रमाण नहीं मिले, फिर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
फर्जी VDS दलील खारिज
होटल मालिकों ने अपने बचाव में तथाकथित Voluntary Disclosure Scheme (VDS) का हवाला दिया, लेकिन फरवरी 2025 में एनजीटी ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे फर्जी और गैर-कानूनी योजना करार दिया। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा कि भूजल दोहन किसी वैध सरकारी अनुमति के बिना किया गया।
PIL से खुला मामला
यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता Varun Gulati द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) के बाद सामने आया। शुरुआती जांच में जुर्माना करीब ₹4.5 करोड़ तय किया गया था, लेकिन एनजीटी के हस्तक्षेप और नए नियमों के बाद इसे बढ़ाकर ₹22.46 करोड़ कर दिया गया।
जल प्रबंधन पर सवाल
यह घोटाला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली भीषण जल संकट से जूझ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला प्रशासनिक विफलता, निगरानी तंत्र की कमजोरी और जल संसाधनों के दुरुपयोग की गंभीर तस्वीर पेश करता है। एनजीटी का यह फैसला भविष्य में भूजल संरक्षण कानूनों के सख्त पालन की दिशा में अहम माना जा रहा है।

