सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश को बरकरार रखा

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नई दिल्ली, 19 मई: सार्वजनिक सुरक्षा और नागरिकों के जीवन के अधिकार को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, खेल परिसरों और हवाई अड्डों जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने पहले के आदेश को बरकरार रखा है।

131 पन्नों के इस महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में जारी अपने आदेश को चुनौती देने वाली विभिन्न पशु कल्याण संगठनों की याचिकाओं को खारिज कर दिया।

यह फैसला “City Hounded by Strays, Kids Pay Price” मामले में सुनाया गया, जिसमें अदालत ने देशभर में बढ़ते डॉग बाइट मामलों और सार्वजनिक संस्थानों में आवारा कुत्तों की बढ़ती मौजूदगी पर गंभीर चिंता जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। अदालत ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का परिणाम बताया।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

अदालत ने सभी राज्य सरकारों, नगर निकायों और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे:

  • स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और खेल परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाएं,
  • कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी सुनिश्चित करें,
  • उन्हें निर्धारित शेल्टर होम में स्थानांतरित करें,
  • ऐसे कुत्तों को दोबारा उसी संस्थागत क्षेत्र में न छोड़ा जाए,
  • संस्थानों में सुरक्षा दीवार, गेट और बैरिकेडिंग मजबूत की जाए,
  • नियमित निरीक्षण किया जाए,
  • अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए,
  • स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य संवेदनशील परिसरों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को “उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जा सकता।”

अदालत ने कहा कि ऐसा करना सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य को विफल कर देगा।

पशु कल्याण संगठनों की दलील खारिज

पशु कल्याण संगठनों ने अदालत में दलील दी थी कि Animal Birth Control (ABC) Rules, 2023 के तहत नसबंदी किए गए कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाना अनिवार्य है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि:

  • स्कूल,
  • अस्पताल,
  • एयरपोर्ट,
  • रेलवे स्टेशन,
  • खेल परिसर

को सामान्य “सड़क क्षेत्र” नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों को हर सार्वजनिक स्थान पर रहने का “पूर्ण अधिकार” नहीं दिया जा सकता और संवेदनशील संस्थागत परिसरों को सुरक्षित और व्यवस्थित रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

अनुच्छेद 21 का हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के “जीवन के अधिकार” में:

  • सुरक्षित सार्वजनिक स्थान,
  • स्वतंत्र आवाजाही,
  • स्वास्थ्य सुरक्षा,
  • और खतरों से संरक्षण, भी शामिल है।

अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों की अनियंत्रित संख्या अब सार्वजनिक सुरक्षा संकट का रूप ले चुकी है।

आर्थिक बोझ पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान पशु कल्याण संगठनों ने अदालत को बताया कि इस आदेश को पूरे देश में लागू करने के लिए:

  • 77,000 से अधिक शेल्टर होम,
  • हजारों एकड़ भूमि,
  • 22,000 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक खर्च,
  • और बड़े स्तर पर पशु चिकित्सकीय एवं मानव संसाधन व्यवस्था की आवश्यकता होगी।

अदालत ने इन व्यावहारिक और वित्तीय पहलुओं पर भी विस्तार से विचार किया।

सुप्रीम कोर्ट ने पुराने आदेश को बरकरार रखा

अपने अंतिम निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 के आदेश को पूरी तरह बरकरार रखते हुए कहा कि स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और अन्य संस्थागत परिसर Animal Birth Control Rules, 2023 के तहत “सामान्य सड़क क्षेत्र” की श्रेणी में नहीं आते।

अदालत ने स्पष्ट किया कि पशु कल्याण कानूनों के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक हित सर्वोपरि हैं।

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