नई दिल्ली: साकेत जिला न्यायालय में कोर्ट स्टाफ की दुखद मौत के बाद पूरे न्यायिक तंत्र में बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत शर्मा ने इसे न्याय व्यवस्था के लिए एक “चेतावनी” करार दिया है।
मीडिया से बातचीत में भारत शर्मा ने कहा कि यदि अदालत परिसर के भीतर इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता की ओर इशारा करता है।
“कोर्ट स्टाफ, वकील और जज—हम सब मिलकर एक लीगल फैमिली की तरह काम करते हैं। अगर कोर्ट के कामकाजी समय के दौरान या कोर्ट परिसर में ऐसा कुछ होता है, तो यह पूरी न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने बताया कि पहले से ही वकील भारी केस पेंडेंसी और लगातार बढ़ते दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे में अगर कोर्ट स्टाफ भी अत्यधिक तनाव का शिकार हो रहा है, तो यह आम जनता के न्याय व्यवस्था पर भरोसे को भी प्रभावित करता है।
इस घटना के बाद हुए विरोध प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए बार अध्यक्ष ने कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह जायज था।
“जिस साथी को हमने खोया है, वह हमारा ही हिस्सा था। बार और बेंच का रिश्ता वर्षों पुराना है और आगे भी बना रहेगा, लेकिन ऐसी घटनाएं हमें मजबूर करती हैं कि हम सुधार की मांग करें,” उन्होंने कहा।
कोर्ट का कामकाज प्रभावित होगा या नहीं—इस सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
“बार एसोसिएशन बैठकर तय करेगी कि आगे क्या कदम उठाए जाएं। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वास्तविक कारण क्या था—क्या यह कोर्ट से जुड़ा तनाव था, पारिवारिक कारण थे या कोई अन्य दबाव,” उन्होंने कहा।
भारत शर्मा ने ज़ोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि वकीलों, कोर्ट स्टाफ और न्यायाधीशों—तीनों के लिए एक समान और प्रभावी स्ट्रेस मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाए।
“आज की तारीख में न्याय प्रणाली से जुड़ा हर व्यक्ति किसी न किसी तरह के मानसिक दबाव से गुजर रहा है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,” उन्होंने कहा।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और बार एसोसिएशन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।

