नई दिल्ली: नगर निगम दिल्ली (MCD) ने फैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास स्थित रामलीला ग्राउंड में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के अनुपालन में की है।
रामलीला ग्राउंड, भारत सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) के अंतर्गत आता है, जिसके लिए MCD अधिकृत लाइसेंसी है। एक शिकायत के बाद MCD ने L&DO और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के अधिकारियों के साथ संयुक्त सर्वे किया। सर्वे में सामने आया कि लगभग 36,428 वर्गफुट भूमि पर अवैध व्यावसायिक अतिक्रमण किया गया था, जिसमें एक बैंक्वेट हॉल, निजी डायग्नोस्टिक सेंटर और सड़क व फुटपाथ पर कब्ज़ा शामिल था।
इसके बाद एक संस्था द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में रिट याचिका (W.P.(C) No. 17153/2025) दायर की गई। 12 नवंबर 2025 को हाई कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद तीन महीने के भीतर अतिक्रमण हटाया जाए।
कोर्ट के आदेश के पालन में MCD ने 24 नवंबर और 16 दिसंबर 2025 को व्यक्तिगत सुनवाई आयोजित की। इन सुनवाइयों में मस्जिद सैयद फैज़-ए-इलाही की प्रबंधन समिति, दिल्ली वक्फ बोर्ड, DDA, L&DO और GNCTD के राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
सभी दस्तावेज़ों और बयानों की समीक्षा के बाद MCD ने 22 दिसंबर 2025 को आदेश पारित किया। इसमें स्पष्ट किया गया कि 1940 में निष्पादित लीज़ डीड केवल 0.195 एकड़ भूमि तक सीमित थी, जिसमें एक टिन शेड, हुजरा, प्लेटफॉर्म और कब्रिस्तान शामिल था। इससे अधिक भूमि पर न तो वक्फ बोर्ड और न ही प्रबंधन समिति कोई वैध स्वामित्व या अधिकार सिद्ध कर सकी।
इसी आधार पर 7 जनवरी 2026 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जिसमें केवल अवैध व्यावसायिक ढांचे हटाए गए। 0.195 एकड़ लीज़ वाली भूमि और मस्जिद को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया।
MCD ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी, दस्तावेज़ आधारित और कोर्ट-आदेशित है, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक भूमि को मुक्त कराना और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को रोकना है — न कि किसी धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचाना।

