नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की स्पेशल टास्क फोर्स ने पुनीत गर्ग, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM) के पूर्व निदेशक, को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई RCOM और उसकी समूह कंपनियों से जुड़े कथित ₹40,000 करोड़ के बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई है।
ED के अनुसार, गिरफ्तारी 29 जनवरी 2026 को की गई। यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा 21 अगस्त 2025 को दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। FIR में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धाराएँ 120-B, 406 और 420, तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1989 की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(d) के तहत अपराध दर्ज हैं।
ED ने बताया कि पुनीत गर्ग ने 2001 से 2025 के बीच RCOM में विभिन्न वरिष्ठ प्रबंधकीय और निदेशक पदों पर कार्य किया। वे 2006–2013 के दौरान ग्लोबल एंटरप्राइज़ बिज़नेस के प्रेसिडेंट, 2014–2017 में प्रेसिडेंट (रेगुलेटरी अफेयर्स), अक्टूबर 2017 से एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर और अप्रैल 2019 से अप्रैल 2025 तक नॉन-एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर रहे।
जांच में यह सामने आया है कि गर्ग कथित बैंक फ्रॉड से उत्पन्न अपराध की आय (Proceeds of Crime) के अधिग्रहण, कब्ज़े, छिपाव, लेयरिंग और अपव्यय में सक्रिय रूप से शामिल थे। ED के मुताबिक, सार्वजनिक धन (बैंक ऋण) को RCOM की विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर एंटिटीज़ के माध्यम से डायवर्ट किया गया।

एक अहम खुलासे में ED ने बताया कि अपराध की आय से मैनहैटन, न्यूयॉर्क (USA) में एक लग्ज़री कंडोमिनियम अपार्टमेंट खरीदा गया। RCOM की कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दौरान इस संपत्ति को कथित तौर पर रिज़ोल्यूशन प्रोफेशनल की जानकारी या सहमति के बिना पुनीत गर्ग द्वारा धोखाधड़ी से बेच दिया गया।
इस बिक्री से प्राप्त US$ 8.3 मिलियन की राशि को कथित तौर पर दुबई-आधारित एक इकाई के साथ शाम निवेश (sham investment) व्यवस्था के नाम पर अमेरिका से बाहर भेजा गया, जो एक पाकिस्तान-लिंक्ड व्यक्ति के नियंत्रण में बताई गई है।
ED ने यह भी पाया कि अपराध की आय का एक हिस्सा—जो कि RCOM द्वारा लिए गए सार्वजनिक बैंक ऋण थे—को पुनीत गर्ग के निजी खर्चों, जिनमें उनके बच्चों की विदेशी शिक्षा से जुड़े भुगतान शामिल हैं, के लिए इस्तेमाल किया गया।
पुनीत गर्ग को विशेष अदालत (PMLA), राउज़ एवेन्यू कोर्ट्स, नई दिल्ली में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने ED को 9 दिन की कस्टोडियल रिमांड प्रदान की। ED ने कहा कि आगे की पूछताछ शेष अपराध की आय का पता लगाने, अन्य लाभार्थियों की पहचान करने और पूरी मनी-लॉन्ड्रिंग ट्रेल उजागर करने के लिए आवश्यक है।
मामले में आगे की जांच जारी है।

