नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार “जेल जाएंगे”। कांग्रेस के बयान के अनुसार, रविवार, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ रैली में इंडिया गठबंधन के नेताओं ने उन्हें हटाने की मांग की।
कांग्रेस ने कहा कि रैली में लाखों लोग पहुंचे। राहुल गांधी ने पिछले महीने इस रैली का आह्वान किया था। वोट चोरी के आरोप इन नेताओं के अपने दावे हैं और ये स्थापित नहीं हुए हैं; कांग्रेस के बयान में चुनाव आयोग या भाजपा की कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं थी।
कौन-कौन शामिल हुआ
बयान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, एम ए बेबी, संजय राउत और सुप्रिया सुले समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी बताई गई।
राहुल गांधी के आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में लंबे समय से वोट चोरी हो रही है। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और हरियाणा के साथ 2024 के आम चुनाव में भी चुनाव चुराए गए।
उन्होंने दावा किया कि 2024 के चुनाव के बाद करीब 13.3 करोड़ यानी 15 प्रतिशत मतदाता सूची से हटाए गए, जबकि एनडीए और इंडिया के वोट शेयर का अंतर तीन प्रतिशत था। उन्होंने कहा, “अगर हटाए गए मतदाता वैध नहीं थे, तो इसका मतलब है कि 2024 का चुनाव अवैध था।”
उन्होंने कहा, “लिख लीजिए, ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे।” राहुल गांधी ने कथित चोरी को “दुर्लभतम में दुर्लभ” मामला और “देशद्रोह” बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से उन्होंने कहा, “आप सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।”
उन्होंने यह भी कहा, “हम नरेंद्र मोदी, अमित शाह या ज्ञानेश कुमार से नफरत नहीं करते,” और जोड़ा, “हम हिंसा करने वाले लोग नहीं हैं।”
खरगे ने क्या कहा
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त की मिलीभगत से वोट जोड़ और हटा रही है। उन्होंने कहा, “मतदाता मोदी को नहीं चुनते, मोदी मतदाताओं को चुनते हैं।”
उन्होंने कहा कि मोदी और शाह चाहे जितना बचाने की कोशिश करें, ज्ञानेश कुमार को जाना होगा।
संस्थाओं और रोजगार पर दावे
राहुल गांधी ने यह आरोप भी लगाया कि आरएसएस ने सीबीआई, ईडी, न्यायपालिका, नौकरशाही और पुलिस समेत संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनका हक और युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही, जबकि चहेते अरबपतियों के कर्ज माफ हो रहे हैं।

