नई दिल्ली: यमुना नदी का जलस्तर दिल्ली में 207 मीटर के खतरनाक स्तर को पार कर गया है। 1963 के बाद यह पांचवीं बार है जब नदी इतनी ऊंचाई पर पहुंची है। इसके चलते राजधानी के कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
यमुना बाजार, जहां कल तक राहत शिविर लगाया गया था, पूरी तरह डूब चुका है। पानी दिल्ली सचिवालय के आसपास तक पहुंच गया है। upscale सिविल लाइंस, बेला रोड, स्वामीनारायण मंदिर और पास की कॉलोनियों में पानी भर गया है, जिससे दिल्ली के सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर और तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सिविल लाइंस में बाढ़ का कहर
बेला रोड पर सर्विस लेन पूरी तरह डूब गई है। फ्लाईओवर और फुटओवर ब्रिज की सीढ़ियां पानी में समा गई हैं। बंगलों में पानी घुस गया है, जहां उच्चवर्गीय लोग रहते हैं। लोगों को भरोसा था कि शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर उन्हें बचाएगा, लेकिन अब तस्वीरें बदल गई हैं।
स्वामीनारायण मंदिर की सीढ़ियों तक पानी पहुंच चुका है। दुकानदारों ने सामान को फुटओवर ब्रिज और ऊंची जगहों पर शिफ्ट किया है। कई घरों के दरवाजे पानी की वजह से बंद हो गए हैं और लोग ऊपरी मंजिलों पर फंसे हुए हैं।
नालों का बैकफ्लो बढ़ा खतरा
अधिकारियों के अनुसार, यमुना का पानी नालों से बैकफ्लो होकर शहर के भीतर घुस रहा है। एजेंसियों ने नालों को रोकने के लिए रेत की बोरियां रखीं, लेकिन हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
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कॉलोनियों के गेट, दुकानें, मकान और मंदिर सब डूब चुके हैं। लोग मजबूरी में ऊंची जगहों पर सामान रख रहे हैं और पानी से बचने के इंतजाम कर रहे हैं।
2023 जैसे हालात का डर
अगर जलस्तर 208 मीटर तक पहुंचता है तो हालात 2023 जैसी बाढ़ त्रासदी की तरह हो सकते हैं। अभी उम्मीद है कि देर शाम तक जलस्तर घट सकता है। फिलहाल, सिविल लाइंस, बेला रोड, बंगलों, दुकानों और मंदिरों में पानी भर चुका है।

