राज्यसभा सभापति की मंजूरी से AAP के बागी सांसदों का BJP में विलय, संख्या संतुलन बदला

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नई दिल्ली: एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में राज्यसभा के सभापति ने आम आदमी पार्टी (AAP) के बागी सांसदों के समूह के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को मंजूरी दे दी है, जिससे उच्च सदन में संख्या संतुलन में बड़ा बदलाव आया है।

जानकारी के अनुसार, AAP से अलग हुए सात राज्यसभा सांसदों का समूह अब औपचारिक रूप से BJP में शामिल हो गया है। सभापति की मंजूरी के बाद राज्यसभा में BJP की संख्या बढ़कर 113 हो गई है, जबकि AAP के सांसदों की संख्या 10 से घटकर मात्र 3 रह गई है।

यह पूरी प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों के तहत की गई है। दल-बदल कानून के अनुसार, यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद किसी अन्य दल में विलय का निर्णय लेते हैं, तो इसे वैध माना जाता है और उन पर अयोग्यता लागू नहीं होती।

विलय के लिए आवेदन देने वाले सात सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता शामिल हैं। इन सभी ने अलग गुट बनाकर राज्यसभा सभापति को औपचारिक रूप से विलय का अनुरोध किया था।

सभापति कार्यालय ने इन आवेदनों की जांच की, जिसमें हस्ताक्षरों का मिलान और प्रक्रिया की वैधता की पुष्टि की गई। सभी नियमों का पालन सुनिश्चित होने के बाद इस विलय को मंजूरी दे दी गई।

इसके बाद राज्यसभा की आधिकारिक सूची को अपडेट किया गया, जिसमें इन सातों सांसदों को अब BJP के सांसद के रूप में दर्शाया गया है।

इस बदलाव को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा में BJP की बढ़ी हुई संख्या आगामी विधायी कार्यों में उसे बढ़त दिला सकती है। वहीं, पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों के संदर्भ में भी इस घटनाक्रम को अहम माना जा रहा है।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने इस फैसले को चुनौती देने के संकेत दिए हैं। पार्टी का कहना है कि विलय का आकलन पूरी पार्टी की कुल संख्या के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल एक सदन के आधार पर, और इस मामले में कानूनी विकल्प अभी भी खुले हैं।

राघव चड्ढा ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने का निर्णय सामूहिक था और यह कदम पार्टी के अंदरूनी माहौल को देखते हुए उठाया गया। उन्होंने कहा कि अब वे एक नए मंच के साथ “सकारात्मक राजनीति” करना चाहते हैं।

सभापति की मंजूरी के साथ यह विलय प्रभावी हो चुका है, हालांकि आने वाले दिनों में इस पर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

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