नई दिल्ली: कभी मैनेजमेंट गुरु कहलाने वाले और शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिज़नेस से एमबीए व पीएचडी डिग्री हासिल करने वाले बाबा चैतन्यनंद सरस्वती उर्फ पार्थ सारथी आज यौन शोषण, धोखाधड़ी और डराने-धमकाने जैसे संगीन आरोपों में घिर चुके हैं।
दिल्ली के पॉश इलाके में बने उनके आलीशान आश्रम-कम-इंस्टीट्यूट की दीवारों के पीछे की हकीकत किसी थ्रिलर से कम नहीं। जहां किताबों और क्लासरूम की आड़ में छात्राओं का उत्पीड़न होता रहा। शिकायतों के मुताबिक 17 छात्राओं ने बाबा पर छेड़छाड़, गंदे संदेश भेजने और जबरदस्ती छूने के आरोप लगाए हैं। संस्थान के भीतर ऐसा माहौल बना दिया गया था कि कोई भी विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।
यह पहला मौका नहीं है जब बाबा का काला चेहरा सामने आया। 2009 में भी उन पर इसी तरह के आरोप लगे थे। लेकिन संस्थान पर उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि वह बार-बार बच निकलते रहे। छात्राओं ने पहले स्थानीय स्तर पर शिकायत की, फिर मामला एयरफोर्स मुख्यालय तक पहुंचा। इसके बाद ही पुलिस हरकत में आई।
जांच में बाबा की कई करतूतें और उजागर हुईं। उनके आश्रम में खड़ी लक्जरी वोल्वो कार पर फर्जी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट मिली। वित्तीय अनियमितताओं में करोड़ों की हेराफेरी और फर्जी ट्रस्ट बनाने के सबूत भी सामने आए।
कभी अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में रिसर्च प्रकाशित कराने वाला और मैनेजमेंट की किताबें लिखने वाला चैतन्यनंद आज सलाखों के पीछे है। जिस जगह को ज्ञान का केंद्र बताया गया था, वही जगह अब ‘डर्टी गेम’ और शोषण का अड्डा साबित हो रही है।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इतने बड़े साम्राज्य को खड़ा करने में किन रसूखदारों का हाथ था। सवाल यह भी है कि क्या सत्ता और प्रभाव के आगे न्याय टिक पाएगा, या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा।

