नई दिल्ली: शालीमार बाग इलाके में प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर निवासियों में भारी चिंता व्याप्त है। मैक्स हॉस्पिटल रोड के पास लगभग एक किलोमीटर लंबे हिस्से में लगाए गए नोटिसों में उन मकानों से संपत्ति के दस्तावेज़ मांगे गए हैं, जो कथित तौर पर चौड़ीकरण की जद में आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले क्षेत्र में डिमार्केशन किया जा चुका है और अब नोटिसों के बाद उन्हें अगले कदम के रूप में तोड़फोड़ की आशंका सता रही है। निवासियों ने स्पष्ट किया कि यह इलाका झुग्गी-झोपड़ी नहीं, बल्कि बहुमंज़िला पक्के मकानों का है, जहां परिवार 30–50 वर्षों से रह रहे हैं। कई घर कई पीढ़ियों से आबाद हैं और निर्माण के लिए लोगों ने बैंक ऋण भी लिया हुआ है।

वरिष्ठ नागरिकों ने बताया कि वर्षों पहले जलभराव और भराव की समस्याओं के बावजूद उन्होंने मेहनत से अपने घर बनाए। “अगर घर ही नहीं रहेगा तो ऋण कैसे चुकाएंगे और रहेंगे कहां?”—यह सवाल कई परिवार उठा रहे हैं।
निवासियों का यह भी आरोप है कि मुख्यमंत्री से समाधान की उम्मीद में मुलाकात के बाद, राहत मिलने के बजाय कार्रवाई की गति और तेज हो गई। लोगों का कहना है कि मुलाकात के तुरंत बाद ही इलाके में नोटिस लगने लगे, जिससे असंतोष और बढ़ा।

स्थानीय लोग वैकल्पिक समाधान भी सुझा रहे हैं। उनका कहना है कि डिवाइडर, नाला और कम-उपयोग वाले फुटपाथ को पुनर्रचना कर 20–23 फीट अतिरिक्त जगह निकाली जा सकती है, जिससे घरों को नुकसान पहुंचाए बिना सड़क चौड़ी हो सके। कई परिवारों का दावा है कि उनके पास 1970 के दशक से पंजीकरण और राजस्व दस्तावेज़ मौजूद हैं।
हालांकि, निवासियों का कहना है कि उनकी बात सुनने के लिए न तो अधिकारी आगे आ रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। “जब लोग ही यहां नहीं रहेंगे तो सड़क चौड़ी करने का लाभ किसे मिलेगा?”—यह सवाल इलाके में गूंज रहा है।

फिलहाल, निवासी पारदर्शी संवाद, वैकल्पिक योजना और जबरन विस्थापन से सुरक्षा की मांग कर रहे हैं, चेतावनी देते हुए कि उनकी चिंताओं को नज़रअंदाज़ किया गया तो स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।

