शालीमार बाग में नोटिस के बाद सिर्फ 60 लोग आए सामने, ज़्यादातर ने GPA के आधार पर पेश किए दस्तावेज

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नई दिल्ली: दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में मैक्स हॉस्पिटल रोड के पास प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना से जुड़े मामलों को लेकर डॉ. साहिब सिंह वर्मा सामुदायिक भवन में दस्तावेज़ सत्यापन कैंप लगाया गया। यह कैंप उन निवासियों के लिए आयोजित किया गया था, जिन्हें प्रशासन की ओर से नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपने मकानों के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज़ प्रस्तुत करने या यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि उनके मकानों को क्यों न तोड़ा जाए।

कैंप के दौरान अधिकारी दस्तावेज़ों की जांच करते, रजिस्टर में प्रविष्टियां दर्ज करते और दस्तावेज़ जमा करने वालों को मोहर लगी रिसीविंग प्रदान करते नजर आए। अधिकारियों के अनुसार, यह कैंप पहले 28 और 29 तारीख के लिए निर्धारित था, जिसे बाद में एक दिन के लिए और बढ़ाया गया ताकि अधिक लोग अपने कागज़ जमा कर सकें।

कैंप में मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि अब तक करीब 60 लोगों ने अपने दस्तावेज़ प्रस्तुत किए हैं। “हम सभी कागज़ स्वीकार कर रहे हैं, उनकी एंट्री रजिस्टर में कर रहे हैं और उचित रिसीविंग देकर उन्हें जमा कर रहे हैं। इसके बाद सभी दस्तावेज़ कार्यालय में भेजे जाएंगे,” अधिकारी ने कहा।

दस्तावेज़ों के प्रकार को लेकर अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश लोग जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) से जुड़े कागज़ लेकर पहुंचे हैं। इसके साथ बिजली बिल, पानी के बिल और आधार कार्ड जैसे सहायक दस्तावेज़ भी जमा किए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर किसी भी दस्तावेज़ की वैधता पर निर्णय नहीं लिया जा रहा है।

जब यह सवाल उठाया गया कि क्या केवल बिजली बिल या आधार कार्ड से मालिकाना हक साबित माना जाएगा, तो अधिकारियों ने कहा कि इस पर फैसला बाद में होगा। “हमारा काम सिर्फ दस्तावेज़ इकट्ठा करना है। GPA की वैधता, रजिस्ट्री और मालिकाना हक से जुड़ा अंतिम निर्णय उच्च अधिकारी करेंगे,” एक अधिकारी ने बताया।

कुछ निवासियों की ओर से यह शिकायत भी सामने आई कि उन्हें दस्तावेज़ जमा करने की रिसीविंग नहीं दी जा रही। हालांकि अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि कैंप स्थल पर हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में नोटिस लगाए गए हैं, जिनमें साफ लिखा है कि सभी आवेदकों को विधिवत मोहर लगी रिसीविंग दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी कागज़ रिकॉर्ड में लेकर उन्हें रामपुरा स्थित सेंट्रल नॉर्थ ज़ोन के डीएम कार्यालय में जमा कराया जा रहा है।

रजिस्टर्ड सेल डीड से जुड़े सवालों पर अधिकारियों ने टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि व्यक्तिगत दस्तावेज़ों का विवरण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट किया जा सकेगा। उनका कहना है कि इस चरण में किसी भी दस्तावेज़ को अस्वीकार नहीं किया गया है।

जो लोग तीन दिन के इस कैंप में अपने दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं, उन्हें नोटिस में दी गई समयसीमा के भीतर संबंधित डीएम कार्यालय में जाकर या ई-मेल के माध्यम से अपने कागज़ जमा कराने का विकल्प दिया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, तोड़फोड़, मालिकाना हक की मान्यता और संभावित मुआवजे को लेकर अंतिम निर्णय दस्तावेज़ों की जांच और नीतिगत विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। यह तय किया जाएगा कि कितने दावे वैध हैं, कितनों का मालिकाना हक स्थापित होता है और किन दस्तावेज़ों को अमान्य माना जाता है। मुआवजा भी उन्हीं मामलों में दिया जाएगा, जिनमें मालिकाना हक विधिवत सिद्ध होगा।

फिलहाल पूरी प्रक्रिया जारी है और प्रशासन का कहना है कि अंतिम फैसला प्रशासनिक और नीतिगत स्तर पर लिया जाएगा।

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