नई दिल्ली: दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को सबसे ज़्यादा प्रदूषित करने वाला स्रोत कौन-सा है? सरकारी आंकड़े साफ बताते हैं कि यमुना में गिरने वाले कुल प्रदूषण का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले नजफगढ़ नाले से आता है।
सालों तक यमुना की सफाई सिर्फ फाइलों, घोषणाओं और वादों तक सीमित रही, लेकिन अब दिल्ली सरकार ने तकनीक के सहारे एक निर्णायक जंग छेड़ दी है।
इस कड़ी में फिनलैंड से मंगाई गई हाईटेक ‘वॉटर मास्टर एम्फीबियन मल्टीपर्पस ड्रेजर’ मशीन को नजफगढ़ नाले में उतारा गया है। यह मशीन जमीन और पानी—दोनों पर काम करने में सक्षम है और 6 मीटर गहराई तक बिना रुके सफाई कर सकती है।

इस मशीन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 600 क्यूबिक मीटर प्रति घंटे की स्लज पंपिंग क्षमता है। यह सिर्फ गाद नहीं निकालती, बल्कि सालों से जमी ठोस गंदगी को काटने, जलकुंभी हटाने और कचरे को 1.5 किलोमीटर दूर तक फेंकने में सक्षम है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इसमें GPS ट्रैकिंग और फ्यूल सेंसर भी लगाए गए हैं।
दिल्ली के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा ने हाल ही में इस मशीन को नजफगढ़ नाले में उतारा। इस एक मशीन की कीमत करीब ₹8.04 करोड़ है, जबकि इसके साथ ₹5.25 करोड़ की लागत वाली तीन हॉपर बार्ज भी तैनात की गई हैं।
सरकार का प्लान साफ है—सिर्फ नजफगढ़ नहीं, बल्कि यमुना से जुड़े सभी 32 प्रमुख नालों की मैकेनिकल क्लीनिंग कराई जाएगी। यदि यह ट्रायल सफल रहता है तो आने वाले समय में ऐसी और मशीनें दिल्ली में उतारी जाएंगी।
नजफगढ़ ड्रेन में फिनलैंड से आई अत्याधुनिक ‘वॉटर मास्टर’ मशीन अब कार्यरत है। यह मशीन दशकों पुरानी सिल्ट को आधुनिक सक्शन तकनीक से हटाकर जल प्रवाह को सुचारु बनाएगी और बाढ़ व प्रदूषण नियंत्रण को मजबूती देगी। यमुना और नालों की स्वच्छता की दिशा में यह एक अहम कदम है। pic.twitter.com/DTJzT2P7ut
— Parvesh Sahib Singh (@p_sahibsingh) January 16, 2026
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना को साफ करने का सबसे असरदार तरीका प्रदूषण को उसके स्रोत पर रोकना है। अगर नजफगढ़ ड्रेन का प्रदूषण यमुना में जाने से पहले ही फिल्टर कर दिया जाए, तो नदी का कायाकल्प संभव है।
मंत्री परवेश साहिब सिंह वर्मा का कहना है कि यह सफाई अभियान अब सिर्फ प्रेस बयान नहीं बल्कि एक्शन, टेक्नोलॉजी और जवाबदेही पर आधारित होगा। सरकार का दावा है कि मार्च 2026 तक 32 ऐसी मशीनें पूरे सिस्टम की सफाई में जुट जाएंगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या फिनलैंड की यह तकनीक यमुना को फिर से निर्मल बना पाएगी, या यह भी एक और अधूरा सपना साबित होगा?

