नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। सोमवार से शुरू हो रहे दिल्ली विधानसभा सत्र से ठीक पहले विधानसभा परिसर में प्रदूषण के मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली।
दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली की बिगड़ती हवा कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि यह करीब 40 वर्षों की सामूहिक नाकामी का नतीजा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1985 में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में यह मामला उठा था कि दिल्ली की हवा खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद दशकों तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
सिरसा ने आरोप लगाया कि पहले 15 साल कांग्रेस और उसके बाद 11 साल आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की सत्ता संभाली, लेकिन दोनों ही सरकारें प्रदूषण को लेकर केवल राजनीति करती रहीं। “आज जो हालात हैं, वे वर्षों की नीतिगत विफलताओं का परिणाम हैं,” उन्होंने कहा।
पर्यावरण मंत्री ने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने पर्यावरण से जुड़े कई अहम फैसले लिए हैं, जिनका सीधा लाभ लाखों लोगों को मिला है। उन्होंने कहा कि योजनाओं की पात्रता सीमाएं बढ़ाई गई हैं ताकि अधिक से अधिक योग्य लोग लाभ उठा सकें। इस अवसर पर उन्होंने पार्टी की वरिष्ठ नेता रेखा गुप्ता का भी आभार जताया।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने जोर देकर कहा कि विधानसभा सत्र में प्रदूषण पर गंभीर और तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कैग (CAG) रिपोर्ट में दिल्ली में प्रदूषण से जुड़ी बीते वर्षों की सच्चाई दर्ज है और इसे सदन में पेश किया जाना चाहिए। साथ ही, “शीश महल” से जुड़े खर्चों की जानकारी भी जनता के सामने आनी चाहिए, ताकि 40 साल की नाकामी की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने प्रदूषण के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराने के लिए मास्क पहनकर विधानसभा परिसर में प्रवेश किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने भाजपा सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि आज दिल्ली की जनता को साफ हवा नसीब नहीं हो रही है और लोग मजबूरी में मास्क पहनकर बाहर निकल रहे हैं।
आतिशी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भी प्रदूषण को लेकर कोई ठोस समाधान पेश नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के विधायक मास्क पहनकर यह संदेश देना चाहते हैं कि दिल्ली की जनता किस हालात में जी रही है।
कुल मिलाकर, दिल्ली विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का 40 साल पुराना मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। अब यह देखना अहम होगा कि क्या इस बार सदन में आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर कोई ठोस और दीर्घकालिक समाधान निकल पाता है या नहीं।

