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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को उम्रकैद, एफआईआर के 34 दिन के भीतर दाखिल हुई चार्जशीट

नई दिल्ली, 1 जून: नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के एक मामले में दिल्ली की अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, निहाल विहार थाना पुलिस की त्वरित जांच और प्रभावी अभियोजन के चलते मामले में एफआईआर दर्ज होने के 34 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की गई और पीड़िता को शीघ्र न्याय दिलाया गया।

पुलिस के मुताबिक, नाबालिग लड़की ने कई महीनों तक भय और मानसिक तनाव में रहने के बाद अपने परिवार को बताया कि परिवार के परिचित एक व्यक्ति ने उसके साथ कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया था।

मामला सामने आते ही निहाल विहार थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)(m), धारा 351(2) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत प्राथमिकी दर्ज की।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि पीड़िता का बयान पूरी संवेदनशीलता के साथ दर्ज किया गया। इसके बाद उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए गए ताकि जांच को मजबूत आधार मिल सके।

पुलिस ने आरोपी को एफआईआर दर्ज होने वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया, जिससे मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ सकी।

जांच पूरी कर मात्र 34 दिनों के भीतर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई तेज गति से आगे बढ़ी।

अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष गवाहों के बयान, वैज्ञानिक साक्ष्य और डीएनए प्रोफाइलिंग सहित विभिन्न प्रमाण प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मात्र आठ दिनों में मुकदमे की सुनवाई पूरी कर निर्णय सुनाया।

अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया।

दोष सिद्ध होने पर अदालत ने आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया गया।

अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए ₹16.5 लाख की क्षतिपूर्ति राशि भी स्वीकृत की है।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले को त्वरित जांच, संवेदनशील पुलिसिंग और प्रभावी अभियोजन का उदाहरण बताते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में शीघ्र कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साक्ष्य आधारित जांच और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से अपराधियों को कानून के दायरे में लाने के प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

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