नई दिल्ली: राजधानी की लाखों आबादी के लिए बड़ी राहत की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की तेज़ प्रक्रिया शुरू करने का ऐलान किया है। इस फैसले से करीब 50 लाख लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से मालिकाना हक और बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियां दिल्ली की सबसे बड़ी शहरी समस्याओं में से एक रही हैं और पिछली व्यवस्थाओं में तकनीकी अड़चनों के कारण यह प्रक्रिया बेहद धीमी रही। अब सरकार ने इसे सरल और समयबद्ध बनाने का फैसला लिया है।
संशोधित पीएम-उदय योजना के तहत अब कॉलोनियों को “जैसी हैं, जहां हैं” (As Is Where Is) आधार पर नियमित किया जाएगा। इससे लेआउट प्लान की अनिवार्यता खत्म हो जाएगी, जो अब तक सबसे बड़ी बाधा थी।
दिल्ली की कुल 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से लगभग 1,511 कॉलोनियों को इस योजना के तहत नियमित किया जाएगा। केवल वे कॉलोनियां इससे बाहर रहेंगी जो रिज एरिया, संरक्षित स्मारकों या अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में आती हैं।
इस कदम से करीब 10 लाख परिवारों को बड़ा लाभ मिलेगा। पहले इस योजना के तहत केवल लगभग 4,000 कन्वेयंस डीड ही जारी हो पाई थीं, लेकिन अब प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाया गया है।
प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम लागू किया गया है। अब दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग ही नोडल एजेंसी होगा और एडीएम (Additional District Magistrate) सभी भूखंडों के लिए एकमात्र स्वीकृति अधिकारी होंगे।
सरकार ने पूरी प्रक्रिया के लिए समय सीमा भी तय कर दी है। जीआईएस सर्वे 7 दिन में, कमी संबंधी नोटिस 15 दिन में और कन्वेयंस डीड 45 दिन के भीतर जारी करनी होगी।
आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल 2026 से SWAGAT पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शुरू होगी। एमसीडी नियमितीकरण प्रमाण पत्र जारी करेगी, जबकि राजस्व विभाग मालिकाना दस्तावेज जारी करेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब इन कॉलोनियों में आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी तेजी से काम किया जाएगा, जिससे इन क्षेत्रों का समग्र विकास संभव हो सके।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे “ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि यह निर्णय न केवल लोगों को कानूनी अधिकार देगा, बल्कि दिल्ली के शहरी विकास को भी नई दिशा देगा।

