नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बाढ़ जैसी स्थिति से बचाव के लिए सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरणजीत सिंह ने यमुना के घाटों और बाढ़ संभावित इलाकों का संयुक्त निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान वासुदेव घाट समेत कई स्थानों का जायजा लिया गया, जहां हाल ही में छठ पर्व के दौरान व्यापक रूप से विकास और सौंदर्यीकरण कार्य किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि घाटों का नियमित रखरखाव किया जाएगा ताकि त्योहारों के समय दोबारा करोड़ों रुपये खर्च करने की जरूरत न पड़े।
इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई भी की गई है। अधिकारियों के अनुसार, फ्लड प्लेन में अतिक्रमण बाढ़ के दौरान बड़े नुकसान का कारण बनता है, इसलिए इन्हें हटाना जरूरी है।
बाढ़ नियंत्रण के लिए योजना:
दिल्ली सरकार बाढ़ नियंत्रण को लेकर “एक्शन मोड” में काम कर रही है। इससे पहले हुई उच्च स्तरीय बैठक में जापान मॉडल अपनाने का फैसला लिया गया था। इसके तहत पानी के जमाव को रोकने के लिए पिट्स और करीब 18 डायवर्जन बनाए जाएंगे, जिससे बाढ़ की स्थिति से बचाव हो सके।
प्रशासन का संयुक्त प्रयास:
उपराज्यपाल तरणजीत सिंह ने कहा कि दिल्ली प्रशासन पूरी तरह समन्वय के साथ काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में पानी की समस्या और बरसात के दौरान बाढ़ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री के साथ मिलकर नियमित निरीक्षण जारी रहेगा ताकि काम में तेजी बनी रहे। “बदलाव एकदम से नहीं आएंगे, लेकिन धीरे-धीरे लगातार सुधार देखने को मिलेंगे,” उन्होंने कहा।
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली में बुनियादी ढांचे, स्वच्छता और आपदा प्रबंधन पर लगातार ध्यान देना आवश्यक है, ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
यह निरीक्षण शहर में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

