दिल्ली हाई कोर्ट में अरविंद केजरीवाल की ‘रिक्यूज़ल’ अर्जी पर खुद पेश होकर दलील, जज पर ‘उचित आशंका’ का सवाल

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नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी रिक्यूज़ल (न्यायाधीश को मामले से अलग करने की) अर्जी पर खुद पेश होकर विस्तार से दलील रखी। यह मामला जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच के सामने सुना गया।

सुनवाई की शुरुआत में केजरीवाल ने कहा, “मैम, क्या मैं शुरू कर सकता हूं? आपने मुझे व्यक्तिगत रूप से पेश होने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद। मुझे न्यायपालिका पर पूरा सम्मान है।”

कोर्ट ने उन्हें स्पष्ट किया कि वह केवल रिक्यूज़ल अर्जी पर ही अपनी दलीलें रखें।

“मैं आरोपी के तौर पर नहीं खड़ा हूं”

केजरीवाल ने कहा कि वह इस मामले में आरोपी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में खड़े हैं जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने “सम्मानपूर्वक डिस्चार्ज” किया है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश का हवाला देने की कोशिश की, जिसमें कहा गया था कि अभियोजन का मामला प्रथम दृष्टया संदेह के स्तर तक भी नहीं पहुंचता।

हालांकि, कोर्ट ने उन्हें रिक्यूज़ल मुद्दे पर केंद्रित रहने को कहा।

9 मार्च का आदेश बना मुख्य कारण

केजरीवाल ने कहा कि उनकी “आशंका” की शुरुआत 9 मार्च के हाई कोर्ट के आदेश से हुई, जो उनके अनुसार:

  • केवल सीबीआई की दलीलों पर आधारित था
  • अन्य पक्षों की अनुपस्थिति में पारित हुआ
  • बिना पूरी सुनवाई के ट्रायल कोर्ट के आदेश को “prima facie गलत” बताया गया

उन्होंने कहा, “तीन महीने की सुनवाई और सैकड़ों पन्नों के अध्ययन के बाद आए आदेश को कुछ ही मिनटों में गलत ठहरा दिया गया। इससे मेरे मन में संदेह पैदा हुआ।”

कानूनी आधार: ‘उचित आशंका’

केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Ranjit Thakur बनाम यूनियन ऑफ इंडिया का हवाला देते हुए कहा:

“मुद्दा यह नहीं है कि जज वास्तव में पक्षपाती हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या किसी पक्ष के मन में पक्षपात की उचित आशंका है।”

केजरीवाल के 10 प्रमुख तर्क

केजरीवाल ने अपने रिक्यूज़ल की मांग के पीछे 10 कारण गिनाए:

1. पहले के आदेशों में कड़े निष्कर्ष

उन्होंने कहा कि कोर्ट ने पहले ही ऐसे निष्कर्ष दे दिए, जिससे पूर्वाग्रह का संकेत मिलता है।

2. ट्रायल कोर्ट से विरोधाभास

ट्रायल कोर्ट ने कहा:

  • कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ
  • कोई रिश्वत नहीं
  • कोई ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ नहीं

जबकि हाई कोर्ट के पहले के अवलोकन अलग थे।

3. बिना सुनवाई एक्स-पार्टी आदेश

उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • बिना आरोपी पक्ष को सुने आदेश दिया गया
  • ट्रायल कोर्ट का पूरा रिकॉर्ड नहीं देखा गया

4. ईडी मामले में बिना मांग के राहत

केजरीवाल ने कहा कि:

  • ईडी इस केस में पक्ष नहीं थी
  • फिर भी उसकी कार्यवाही रोक दी गई
  • बिना लिखित आवेदन के यह आदेश दिया गया

5. ‘पेश नहीं हुए’ टिप्पणी पर आपत्ति

उन्होंने कहा, “मैं चार साल से हर सुनवाई में उपस्थित रहा हूं। ऐसा क्यों कहा गया कि हमने पेश होना नहीं चुना?”

6. तेजी से सुनवाई

उन्होंने दावा किया कि उनका मामला अन्य मामलों की तुलना में असामान्य गति से सुना जा रहा है।

7. जवाब दाखिल करने का समय

उन्होंने कहा कि:

  • कम समय दिया गया
  • बाद में सॉलिसिटर जनरल के कहने पर समय बढ़ाया गया

8. सीबीआई/ईडी की दलीलों का पैटर्न

उन्होंने आरोप लगाया कि:

  • लगभग हर दलील स्वीकार की गई
  • हर मांग मंजूर की गई

9. संस्थागत धारणा

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें सीबीआई को “पिंजरे का तोता” कहा गया था।

10. बाहरी बयानों और घटनाओं का असर

उन्होंने कहा कि:

  • कुछ सार्वजनिक बयानों
  • सोशल मीडिया चर्चाओं
  • और अन्य कारकों से उनके मन में आशंका बनी

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यक्तिगत आरोप नहीं, बल्कि “धारणा” है।

कोर्ट की प्रतिक्रिया

जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने बार-बार कहा:

  • सुनवाई केवल रिक्यूज़ल तक सीमित रहे
  • अदालत अपनी प्रक्रिया के अनुसार चलेगी

उन्होंने यह भी कहा, “कोर्ट अपने तरीके से चलती है, और मैं उसी तरह से इसे संचालित करूंगी।”

अंतिम दलील

अंत में केजरीवाल ने कहा:

“ये सभी कारण मिलकर मेरे मन में यह मजबूत आशंका पैदा करते हैं कि मुझे निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी।”

उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि न्याय के हित में इस मामले से खुद को अलग करें।

आगे क्या?

कोर्ट ने सभी दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया है और अब इस पर निर्णय लिया जाएगा कि न्यायाधीश इस मामले से अलग होंगे या नहीं। यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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