नई दिल्ली, 20 मई: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित किए जा रहे DND–फरीदाबाद–सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना का निरीक्षण किया।
इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा और कमलजीत सहरावत, दिल्ली के लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, हरियाणा के लोक निर्माण विभाग मंत्री रणबीर गंगवा, दक्षिण दिल्ली सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी भी मौजूद रहे।
₹4,463 करोड़ की मेगा हाईवे परियोजना
भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहे इस हाई-स्पीड छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे की कुल लंबाई लगभग 59.063 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत ₹4,463 करोड़ है।
यह कॉरिडोर निम्न क्षेत्रों को तेज़ और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा:
- दिल्ली
- नोएडा
- गाजियाबाद
- फरीदाबाद
- गुरुग्राम
- सोहना
परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रा समय में भारी कमी आने और NCR में ट्रैफिक दबाव कम होने की उम्मीद है।
आधुनिक इंजीनियरिंग और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक 140 मीटर लंबा “नेटवर्क आर्क ब्रिज” (NAB) है, जिसे भारत की सबसे उन्नत स्टील ब्रिज संरचनाओं में गिना जा रहा है।
इस पुल का निर्माण:
- आधुनिक टाइड-आर्क तकनीक
- क्रॉस्ड हैंगर सिस्टम
- भूकंपरोधी डिजाइन
के आधार पर किया गया है ताकि संरचना अधिक मजबूत और सुरक्षित रहे।
परियोजना में निम्न आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है:
- प्रीकास्ट सेगमेंटल निर्माण
- लॉन्चिंग गर्डर
- उच्च क्षमता वाला E450 स्टील
- ग्रेड 10.9 बोल्ट
- हाई डैम्पिंग रबर बेयरिंग
- स्विवेल एक्सपेंशन जॉइंट
इसके अलावा सिंचाई नहरों के ऊपर हटाए जा सकने वाले अस्थायी स्टील पाइल सपोर्ट का भी इस्तेमाल किया गया है।
पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर
परियोजना में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों को भी प्राथमिकता दी गई है।
ओखला और गाजीपुर लैंडफिल की बायो-माइनिंग से निकली लगभग 2 लाख मीट्रिक टन निष्क्रिय सामग्री (Inert Material) का उपयोग सड़क निर्माण में किया गया है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भरता कम हुई है।
परियोजना में:
- नॉइज़ बैरियर
- लैंडस्केपिंग
- वृक्षारोपण
जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
जेवर एयरपोर्ट तक सीधी कनेक्टिविटी
इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य प्रस्तावित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक बेहतर और तेज़ कनेक्टिविटी प्रदान करना है, ताकि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके।
यह कॉरिडोर निम्न परियोजनाओं को आपस में जोड़ेगा:
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे
- DND-फरीदाबाद बाईपास
- यमुना एक्सप्रेसवे
- ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE)
₹2,360 करोड़ का महत्वपूर्ण कॉरिडोर
फरीदाबाद के चंदावली गांव से लेकर गौतम बुद्ध नगर के दयानापुर तक लगभग 31.425 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर ₹2,360 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है।
परियोजना के पूरा होने के बाद:
- उत्तर भारत से आने वाला ट्रैफिक सीधे EPE के जरिए जेवर एयरपोर्ट पहुंच सकेगा
- दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से एयरपोर्ट तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी
इससे दिल्ली के अंदर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।
चार प्रमुख इंटरचेंज विकसित होंगे
परियोजना में निम्न स्थानों पर चार बड़े इंटरचेंज बनाए जा रहे हैं:
- DND-सोहना हाईवे
- ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे
- यमुना एक्सप्रेसवे
- DFCC क्रॉसिंग
इसके अलावा आठ-लेन वाला ROB और एलिवेटेड कॉरिडोर भी विकसित किया जाएगा।
NCR के विकास को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
अधिकारियों के अनुसार यह कॉरिडोर फरीदाबाद मास्टर प्लान 2031 के अंतर्गत चिन्हित उच्च घनत्व वाले शहरी विकास क्षेत्रों से होकर गुजरता है।
परियोजना के पूरा होने पर यह NCR के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन कॉरिडोर में शामिल होगी और क्षेत्रीय आर्थिक विकास, लॉजिस्टिक्स और तेज़ आवागमन को नई गति देगी।

