नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फर्जी बैंक गारंटी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बड़े घोटाले में कार्रवाई करते हुए लगभग ₹10.80 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है।
यह मामला टीर्थ गोपिकॉन लिमिटेड (TGL) और उसके प्रमोटरों से जुड़ा है, जिन पर सरकारी एजेंसियों को फर्जी बैंक गारंटी देकर सार्वजनिक धन की धोखाधड़ी से प्राप्ति का आरोप है। ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत एंटी करप्शन ब्यूरो, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) भोपाल और राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर की थी।
जांच में सामने आया कि टीजीएल के प्रबंध निदेशक महेश कुम्भानी ने अपने सहयोगियों राकेश जागिरदार, गौरव धाकड़, राहुल गुप्ता, मोहम्मद फिरोज खान और पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक गोविंद चंद्र हांसदा के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम पर फर्जी बैंक गारंटी तैयार कीं। इन गारंटियों को मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित (MPJNM) और राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RRECL) जैसी सरकारी एजेंसियों को सौंपा गया।
इन फर्जी गारंटियों के आधार पर लगभग ₹202.01 करोड़ की अग्रिम राशि धोखाधड़ी से प्राप्त की गई। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने “pnb-india.co” नामक नकली ईमेल डोमेन का उपयोग कर पंजाब नेशनल बैंक के आधिकारिक ईमेल जैसा दिखाकर एजेंसियों को गुमराह किया और धन जारी करवाया।
ईडी के अनुसार, इस धोखाधड़ी से अर्जित धन को टीजीएल के खातों में जमा कर बाद में विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया। लगभग ₹22.12 करोड़ की राशि टीजीएल के मुख्य खातों से अन्य खातों और महेश कुम्भानी, उनकी पत्नी चंद्रिकाबेन कुम्भानी और पुत्र पल्लव कुम्भानी के निजी खातों में ट्रांसफर की गई, जिसका कोई वैध व्यावसायिक कारण नहीं पाया गया। इसके बाद धन को छिपाने के लिए विभिन्न तरीकों से लेयरिंग कर इंदौर (मध्य प्रदेश) और अहमदाबाद (गुजरात) में अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।
कुर्क की गई संपत्तियों में कुल 9 अचल संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें आवासीय फ्लैट और एक व्यावसायिक संपत्ति शामिल है। अब तक इस मामले में कुल अपराध से अर्जित राशि लगभग ₹202.01 करोड़ आंकी गई है।
इस मामले में सीबीआई ने महेश कुम्भानी, मोहम्मद फिरोज खान, गोविंद चंद्र हांसदा, गौरव धाकड़ और राहुल गुप्ता को गिरफ्तार कर 16 सितंबर 2025 को इंदौर स्थित विशेष सीबीआई अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है।
ईडी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है, जिसमें अन्य आरोपियों की पहचान, धन शोधन के नेटवर्क का पता लगाने और अतिरिक्त संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया जारी रहेगी।
एजेंसी ने दोहराया कि आर्थिक अपराधों, विशेषकर सरकारी धन की धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि सार्वजनिक संसाधनों और आर्थिक व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

