नई दिल्ली: कर चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) दिल्ली दक्षिण आयुक्तालय के एंटी-एवेजन शाखा ने ₹8 करोड़ से अधिक के इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का पर्दाफाश किया है और इस मामले में एक कंपनी के निदेशक को गिरफ्तार किया है।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी एक ऐसी कंपनी का निदेशक है जो विभिन्न वस्तुओं के व्यापार में संलग्न है। उस पर सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 16 का उल्लंघन करते हुए फर्जी तरीके से आईटीसी का लाभ लेने और उसका उपयोग करने का आरोप है।
जांच के दौरान डेटा एनालिटिक्स के आधार पर यह जानकारी सामने आई कि संबंधित करदाता ने बिना वास्तविक माल की आपूर्ति के आईटीसी का लाभ उठाया। जिन सप्लायरों के माध्यम से लेन-देन दिखाया गया था, वे या तो निलंबित थे, स्वयं रद्द किए गए थे या उनका पंजीकरण रद्द हो चुका था।
आगे की जांच में बैकवर्ड सप्लाई चेन विश्लेषण से यह भी पाया गया कि एल1, एल2 और एल3 स्तरों पर वास्तविक आपूर्ति का कोई प्रमाण नहीं था, जिससे पूरी क्रेडिट श्रृंखला टूट गई और लिया गया आईटीसी अवैध पाया गया। साथ ही आरोपी ने बिना वास्तविक आपूर्ति के अपने खरीदारों को भी यह अवैध आईटीसी आगे बढ़ाया।
कंपनी के निदेशक का बयान 16 अप्रैल 2026 को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 70 के तहत दर्ज किया गया, जिसमें उसने सभी लेन-देन को नियंत्रित करने की बात स्वीकार की। हालांकि, वह इन लेन-देन की वैधता सिद्ध करने के लिए कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
अधिकारियों ने बताया कि यह अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती श्रेणी में आता है, जो सीजीएसटी अधिनियम की धारा 132(1)(b) और 132(1)(c) के तहत दंडनीय है। आरोपी को धारा 69(1) के तहत गिरफ्तार कर पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे 30 अप्रैल 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मामले में आगे की जांच जारी है।

