नशीले पदार्थों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बनीत सिंह तलवार गिरफ्तार, ED को पांच दिन की हिरासत

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नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय ने अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क में छिपाकर कथित तौर पर नशीले पदार्थों की तस्करी और दिल्ली, पंजाब तथा हरियाणा में हुई बरामदगी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बनीत सिंह तलवार को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी 23 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत हुई।

पश्चिम दिल्ली की तीस हजारी अदालत में विशेष पीएमएलए न्यायाधीश ने उसी दिन तलवार को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया, एजेंसी ने बताया।

बनीत सिंह तलवार की गिरफ्तारी पर ईडी की एक्स पोस्ट
प्रवर्तन निदेशालय की 24 अक्टूबर 2026 की आधिकारिक पोस्ट और विज्ञप्ति।

ईडी की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी की उस एफआईआर पर आधारित है, जो हरप्रीत सिंह तलवार और अन्य के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज की गई थी। ईडी के अनुसार, एनआईए इस मामले में छह आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

एजेंसी का आरोप है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दुबई से संचालित अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह ने नशीले पदार्थ बेचकर धन जुटाया और उसे हवाला के जरिए भेजा। ईडी ने कहा कि पहले की जांच में अवैध मादक पदार्थों की बिक्री से मिले ₹76 करोड़ का पता चला था, जिसे कथित तौर पर अफगानिस्तान भेजकर आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया।

ईडी के मुताबिक, उसकी वित्तीय जांच में अब तक प्रतिबंधित सामान की तस्करी से अर्जित कुल ₹89 करोड़ की कथित अपराध आय सामने आई है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि नशीले पदार्थों की बिक्री की रकम हवाला से अफगानिस्तान भेजी गई और बदले में सामान प्राप्त हुआ।

बनीत सिंह तलवार, हरप्रीत सिंह तलवार का भाई है। ईडी ने हरप्रीत और राजू दुबई के नाम से पहचाने जाने वाले एक वांछित आरोपी को कथित तस्करी नेटवर्क से जोड़ा है। एजेंसी का आरोप है कि एनआईए मामले में हरप्रीत की गिरफ्तारी के बाद भी बनीत उसके वास्तविक नियंत्रण वाली व्यावसायिक इकाइयों का प्रबंधन और संचालन करता रहा।

ईडी ने आरोप लगाया कि बनीत ने एम/एस मैजेंट इंडिया को करीब ₹55 लाख दिए। एजेंसी के अनुसार, यह इकाई हरप्रीत के नियंत्रण में थी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल थी। ईडी का कहना है कि रकम व्यावसायिक लेनदेन की कई परतों, मिलती-जुलती और मिरर एंट्रियों से गुजरकर बनीत तक पहुंची।

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि नकद जमा राशि से बेनामी इकाइयों के नाम पर वाहन खरीदे गए, जिन्हें पहले ही जब्त किया जा चुका है। उसके अनुसार, हरप्रीत से मिली अपराध आय का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में भी हुआ। आगे की जांच जारी है।

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