FSL रिपोर्ट से खुलासा: दिल्ली विधानसभा का वीडियो असली, स्पीकर ने पंजाब सरकार की जांच पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने गुरुवार को उस विवादित वीडियो से जुड़ी फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट सार्वजनिक की, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वीडियो और ऑडियो दोनों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं पाई गई है और विधानसभा का वर्बेटिम पूरी तरह से प्रमाणिक है।

गुप्ता ने बताया कि 8 जनवरी 2026 को सदन की कार्यवाही को लेकर उठे विवाद के बाद, विपक्ष की मांग पर और सर्वसम्मति से निर्णय लेकर वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया था। जांच के लिए दिल्ली विधानसभा की ओर से पूरा ऑडियो-वीडियो डेटा FSL को उपलब्ध कराया गया।

FSL रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्पीकर ने कहा कि फ्रेम-बाय-फ्रेम विश्लेषण और उन्नत वीडियो एनालिसिस सिस्टम के जरिए जांच की गई, जिसमें यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि वीडियो में किसी भी प्रकार की एडिटिंग, टेंपरिंग या हेरफेर नहीं हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लैब में सुना गया ऑडियो और उपलब्ध ट्रांसक्रिप्शन पूरी तरह मेल खाते हैं।

विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि जब विधानसभा में फॉरेंसिक जांच पर सहमति बनी, उसी दौरान पंजाब में एक समानांतर जांच करवाई गई और उसके आधार पर एक अंतरिम अदालत आदेश हासिल किया गया। उन्होंने कहा कि यह आदेश अंतिम फैसला नहीं, बल्कि केवल एक अंतरिम निर्देश है, जिसमें न तो दोष तय हुआ है और न ही सच्चाई।

स्पीकर ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि पंजाब में फॉरेंसिक जांच किसके आदेश पर कराई गई, वह लैब किसके नियंत्रण में है, और जब दिल्ली विधानसभा पहले से ही जांच करा रही थी, तो बिना समन्वय के यह समानांतर प्रक्रिया क्यों अपनाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि उस आदेश में वीडियो की चेन ऑफ कस्टडी, स्रोत, डिवाइस और जब्ती की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

गुप्ता ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष आतिशी सदन में जवाब देने से बचती रहीं, तब राजनीतिक दबाव के जरिए राज्य एजेंसियों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में चर्चा से बचकर बाहर की एजेंसियों के सहारे राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की गई।

अध्यक्ष ने कहा कि यह मामला प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है क्योंकि फॉरेंसिक रिपोर्ट को चुनौती देने का कोई अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एक जिला अदालत द्वारा पूरे देश के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप लागू करना अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

विजेंद्र गुप्ता ने स्पष्ट किया कि वे न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन अंतरिम आदेशों को राजनीतिक ढाल बनाकर सच्चाई दबाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि विधानसभा की गरिमा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है।

स्पीकर ने आगे कहा कि दिल्ली विधानसभा द्वारा कराई गई FSL जांच से अब स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है। उन्होंने संकेत दिया कि आगे कानूनी और संस्थागत कदम उठाए जाएंगे और विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अंत में, उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपने शब्द वापस लेने और माफी मांगने की अपील की। गुप्ता ने कहा कि यदि ऐसा किया जाता है, तो सदन उदारता दिखाने पर विचार कर सकता है।

Also Read: FSL Clears Delhi Assembly Video of Tampering, Speaker Vijender Gupta Targets Opposition, Punjab Govt Under Fire


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