नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर “बंदरों की आवाज़ निकालकर नौकरी” को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, आधिकारिक दस्तावेज़ों से स्पष्ट होता है कि दिल्ली सरकार ने कोई अजीबोगरीब व्यक्तिगत नौकरी नहीं निकाली है, बल्कि दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों के आतंक से निपटने के लिए एक औपचारिक सेवा-टेंडर जारी किया गया है।
यह टेंडर लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली सरकार द्वारा जारी किया गया है, जिसमें दिल्ली विधानसभा (पुराना सचिवालय, सिविल लाइंस) परिसर में ‘मंकी एक्सपर्ट’ सेवाएं प्रदान करने के लिए अनुभवी एजेंसियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
टेंडर दस्तावेज़ के अनुसार, इस कार्य की अनुमानित लागत लगभग ₹17.52 लाख है और अनुबंध अवधि 365 दिनों (एक वर्ष) की होगी। कार्य का उद्देश्य बंदरों से होने वाली अव्यवस्था, सुरक्षा जोखिम और संपत्ति नुकसान को रोकना है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि टेंडर में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि किसी व्यक्ति को 8 घंटे तक चिल्लाकर या बंदरों की नकल कर काम करना होगा। यह कोई सीधी भर्ती या बेरोज़गार युवाओं के लिए व्यक्तिगत नौकरी नहीं है, बल्कि सरकारी परिसरों के लिए पेशेवर, अनुभवी एजेंसियों को आउटसोर्स किया जाने वाला सेवा अनुबंध है।
योग्यता शर्तों के तहत, केवल वही एजेंसियां आवेदन कर सकती हैं जिन्हें पिछले सात वर्षों में सरकारी या सार्वजनिक संस्थानों के लिए ‘मंकी एक्सपर्ट’ या बंदर नियंत्रण सेवाएं प्रदान करने का अनुभव हो। साथ ही, GST पंजीकरण, EPFO, ESIC और अन्य वैधानिक अनुपालनों को अनिवार्य किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली के कई हिस्सों में बंदरों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, खासकर विधानसभा और अन्य उच्च-सुरक्षा क्षेत्रों में। पहले अपनाए गए कुछ उपाय समय के साथ अप्रभावी हो गए, जिसके चलते अब प्रशिक्षित और पेशेवर सेवाओं पर निर्भरता बढ़ाई जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि ‘मंकी एक्सपर्ट’ शब्द भले ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया हो, लेकिन यह सरकारी प्रक्रियाओं में प्रचलित एक तकनीकी शब्द है, जिसका उद्देश्य केवल सुरक्षा, व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित करना है।

