नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है। हालांकि, यह राहत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों या प्रदर्शन के दौरान हिंसा अथवा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों पर लागू नहीं होगी।
दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने गुरुवार को यह घोषणा की। यह निर्णय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुरूप लिया गया है। आदेश में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यह आदेश सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों पर लागू नहीं होगा।
आदेश के अनुसार, प्रदर्शन के संबंध में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की समीक्षा की जाएगी और जहां लागू होगा, उनकी रिहाई की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाएगी। इसमें यह भी कहा गया है कि इस आदेश के दायरे में आने वाले लोगों के खिलाफ आगे कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी तथा इस मामले को समाप्त माना जाएगा।
मीडिया से बातचीत में आशीष सूद ने कहा कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है या जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान हिंसा कर कानून अपने हाथ में लेने का प्रयास किया, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
यह निर्णय जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चले एक महीने लंबे आंदोलन के समाप्त होने के पांच दिन बाद आया है। 25 जुलाई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सीजेपी की प्रमुख मांगों को स्वीकार किया था, जिनमें एफआईआर वापस लेने और दिल्ली तथा भाजपा या एनडीए शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन शामिल था।
यह घोषणा Shailendra Mani Tripathi v. Union of India & Others मामले में 28 जुलाई को आए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी आई है।
दिल्ली के उपराज्यपाल की मंजूरी से जारी गृह विभाग के आदेश के अनुसार, 29 जुलाई शाम 6 बजे तक दिल्ली पुलिस ने इन प्रदर्शनों से संबंधित 13 मामले दर्ज किए थे।

