नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि देशभर में छात्र केवल परीक्षा संबंधी समस्याओं के खिलाफ नहीं, बल्कि सीखने, सवाल पूछने और अपनी बात रखने की आजादी के लिए भी आवाज उठा रहे हैं।
लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलन देश के युवाओं की भावनाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति हैं और सभी राजनीतिक दलों को उनका सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने एक 18 वर्षीय छात्रा के साथ हुई बातचीत का उल्लेख करते हुए कहा कि वास्तविक विद्यार्थी वह है जो खुले मन, विनम्रता और सत्य की खोज की भावना रखता है। इसके विपरीत, उन्होंने ऐसे लोगों का भी जिक्र किया जो स्वयं को सर्वज्ञ मानते हैं और दूसरों की बात सुनने को तैयार नहीं होते।
राहुल गांधी ने प्रश्नपत्र लीक, परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था में निजीकरण और बढ़ती शिक्षा लागत को छात्रों की नाराजगी के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कारण योग्य छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था पर आरएसएस का प्रभाव है और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इन समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने और अपनी पसंद के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर नहीं दिया जा रहा है तथा हाल के आंदोलन इसी व्यापक असंतोष का प्रतीक हैं।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने छात्र आंदोलनों से निपटने के तरीके को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री की भी आलोचना की और छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आरोप लगाया। उन्होंने सदन में गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए।
ये सभी टिप्पणियां राहुल गांधी ने लोकसभा में बहस के दौरान कीं। उनके कई बयानों पर सदन में सरकार की ओर से आपत्ति भी दर्ज कराई गई।

