नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएसीएल लिमिटेड और उससे संबंधित संस्थाओं से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹999.63 करोड़ मूल्य की 45 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है।
ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियां एम/एस वर्ल्डवाइड रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस वर्ल्डवाइड हाउसिंग प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस वर्ल्डवाइड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर हैं। ये संपत्तियां दिल्ली के रानी खेड़ा, घेवरा और हीरा कुदना क्षेत्र में स्थित हैं और इन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कुर्क किया गया है।
ईडी ने बताया कि जांच की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), नई दिल्ली द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और 420 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। बाद में सीबीआई ने अवैध सामूहिक निवेश योजना चलाने के आरोप में 33 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और अनुपूरक आरोपपत्र दाखिल किए।
आरोपपत्रों के अनुसार, आरोपियों ने कृषि भूमि की बिक्री और विकास के नाम पर देशभर के लाखों निवेशकों से ₹48,000 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई। निवेशकों को नकद भुगतान और किस्त योजना के माध्यम से निवेश के लिए प्रेरित किया गया तथा उनसे भ्रामक दस्तावेजों, समझौतों और पावर ऑफ अटॉर्नी पर हस्ताक्षर कराए गए। अधिकांश मामलों में निवेशकों को भूमि नहीं मिली और लगभग ₹48,000 करोड़ की राशि अब भी बकाया है।
ईडी ने वर्ष 2016 में इस मामले में ईसीआईआर दर्ज की थी। इसके बाद 2018 में अभियोजन शिकायत दाखिल की गई और 2022, 2025 तथा 2026 में छह अनुपूरक अभियोजन शिकायतें विभिन्न आरोपियों और संस्थाओं के विरुद्ध दायर की गईं।
जांच में सामने आया कि कुर्क की गई 45 संपत्तियां निवेशकों के धन से खरीदी गई थीं और इन्हें अपराध से अर्जित संपत्ति माना गया है। ईडी के अनुसार, इन संपत्तियों के लिए इस्तेमाल की गई राशि कथित तौर पर पीएसीएल लिमिटेड से डायवर्ट की गई थी, जिसे मूल रूप से निवेशकों से एकत्र किया गया था।
ईडी ने बताया कि इस कार्रवाई के साथ अब तक इस मामले में भारत और विदेशों में स्थित लगभग ₹29,625.63 करोड़ मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।
मामले में आगे की जांच जारी है।

