आतिशी वीडियो विवाद: सौरभ भारद्वाज ने पंजाब पुलिस की FIR का बचाव किया

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नई दिल्ली: दिल्ली की राजनीति में आतिशी वीडियो विवाद को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच टकराव और तेज हो गया है। AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पंजाब पुलिस द्वारा मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ दर्ज FIR का खुलकर समर्थन करते हुए दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की “विशेषाधिकार (Privilege)” वाली दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

सौरभ भारद्वाज ने स्पष्ट कहा कि जिस वीडियो क्लिप को लेकर विवाद खड़ा किया गया है, वह दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा लाइव टेलीकास्ट की गई थी और आधिकारिक तौर पर YouTube समेत सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। ऐसे में वह वीडियो अब सार्वजनिक डोमेन में है और उस पर जनता चर्चा, आलोचना या विश्लेषण कर सकती है।

AAP नेता का आरोप है कि कपिल मिश्रा ने उसी वीडियो की एक क्लिप को उठाकर उसमें ऐसे शब्द जोड़ दिए जो विधानसभा में कहे ही नहीं गए, और उन शब्दों को आतिशी से जोड़कर पेश किया गया। भारद्वाज के मुताबिक, यह कृत्य न सिर्फ फर्जीवाड़ा (Forgery) है बल्कि सिख धर्म के महान गुरु गुरु तेग बहादुर साहिब के अपमान के समान है।

उन्होंने कहा,
“यह कोई प्रिविलेज का मामला नहीं है। यह सीधा-सीधा जालसाज़ी, धार्मिक उन्माद फैलाने और बेअदबी का गंभीर आपराधिक मामला है। इसमें कई संगीन धाराएं लगती हैं, जिनमें से कई गैर-जमानती हैं।”

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष द्वारा यह कहे जाने पर कि मामला विशेषाधिकार समिति के पास लंबित है, इसलिए पंजाब पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकती, सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विधानसभा की विशेषाधिकार प्रक्रिया और आपराधिक कानून अलग-अलग चलते हैं। उन्होंने 2G घोटाला और कोलगेट जैसे मामलों का उदाहरण देते हुए कहा कि संसद या विधानसभा में चर्चा चलने के बावजूद, आपराधिक जांच और अदालती कार्यवाही समानांतर रूप से चलती रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने इस मामले में तीन नोटिस—पंजाब के डीजीपी, जालंधर पुलिस कमिश्नर और साइबर सेल को भेजे हैं। बावजूद इसके, AAP का मानना है कि FIR पूरी तरह वैध है।

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सौरभ भारद्वाज ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति—चाहे वह विधानसभा अध्यक्ष ही क्यों न हो—उस कथित फर्जी वीडियो को दोबारा साझा करता है या उसे सही ठहराता है, तो उसके खिलाफ भी आपराधिक कार्रवाई संभव है

आतिशी वीडियो विवाद अब केवल एक राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह दिल्ली और पंजाब के बीच कानूनी-राजनीतिक टकराव, धार्मिक भावनाओं और विधायी विशेषाधिकारों के जटिल सवालों में बदल चुका है।

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