नई दिल्ली: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में खुले गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय बैंककर्मी की मौत के मामले ने राजधानी की नागरिक व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों ने दिल्ली जल बोर्ड और पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
मृतक कमल, कैलाशपुरी का निवासी था और पिछले तीन वर्षों से एक निजी बैंक में कार्यरत था। परिजनों के अनुसार, वह 5–6 फरवरी की दरम्यानी रात कार्यालय से घर लौट रहा था। रात करीब 11:30 बजे उसने फोन पर परिवार को बताया था कि वह कुछ ही देर में घर पहुंच जाएगा। इसके बाद उसका संपर्क टूट गया।

चिंतित परिजन और मित्र पूरी रात उसे ढूंढते रहे और कई पुलिस थानों के चक्कर लगाए, लेकिन उनका आरोप है कि गुमशुदगी की शिकायत तत्काल दर्ज नहीं की गई और खोज अभियान में गंभीरता नहीं दिखाई गई।
अगली सुबह पुलिस से सूचना मिली कि कमल का एक्सीडेंट हो गया है। बाद में उसका शव दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गहरे खुले गड्ढे में मिला। घटनास्थल पर उसकी बाइक और हेलमेट भी पड़े थे।
परिवार का आरोप है कि गड्ढा बिना बैरिकेड, बिना कवर और बिना चेतावनी संकेत के खुला छोड़ा गया था, जिससे रात के समय वह दिखाई ही नहीं देता। परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि जब उन्होंने रात में उसी गड्ढे की जांच की थी, तब शव वहां दिखाई नहीं दिया था, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा गया है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मामले में तुरंत कार्रवाई की गई थी। पुलिस के अनुसार, मोबाइल टावर लोकेशन के आधार पर रात में तलाशी अभियान चलाया गया और सुबह एक PCR कॉल के बाद गड्ढे से शव बरामद किया गया।
घटना के बाद दिल्ली जल बोर्ड ने मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की है और कहा है कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में खुले गड्ढों, सड़क सुरक्षा, विभागीय समन्वय और नागरिकों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है।
Legal Note: यह रिपोर्ट परिजनों, पुलिस अधिकारियों और संबंधित विभागों के बयानों पर आधारित है। मामला जांचाधीन है और जिम्मेदारी का निर्धारण सक्षम प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा।

