नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे AI-जनरेटेड वीडियो और Deepfake कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने नए आईटी (IT) नियम जारी करते हुए सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और बढ़ा दी है।
नए नियमों के तहत, यदि सरकार या किसी अदालत द्वारा AI, Deepfake या सिंथेटिक कंटेंट हटाने का आदेश दिया जाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 3 घंटे के भीतर वह कंटेंट हटाना अनिवार्य होगा। इससे पहले यह समय-सीमा 36 घंटे थी।
इसके अलावा, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि AI से तैयार किए गए किसी भी कंटेंट पर साफ-साफ लेबल लगाना अनिवार्य होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह बताना होगा कि संबंधित पोस्ट या वीडियो “AI-जनरेटेड कंटेंट” है, ताकि आम यूज़र भ्रमित न हों।
नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म पर अवैध, फर्जी, भ्रामक या मनगढ़ंत कंटेंट को फैलने से रोकें। इसमें बच्चों के शोषण से जुड़ा कंटेंट, डीपफेक, किसी की नकल करने वाले वीडियो, फर्जी दस्तावेज़ और विस्फोटक सामग्री शामिल हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नए IT नियम 20 फरवरी से लागू होंगे। सरकार का मानना है कि तेज़ी से वायरल होने वाले फर्जी AI वीडियो से होने वाले सामाजिक, आर्थिक और मानसिक नुकसान को रोकने के लिए यह कदम बेहद ज़रूरी था।
Deepfake के शिकार रहे कई लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अब तक कोर्ट ऑर्डर के ज़रिए वीडियो हटवाने में काफी समय लग जाता था, तब तक लाखों लोग ऐसे फर्जी कंटेंट देख चुके होते थे।
अब 3 घंटे की समय-सीमा से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और ठगी को रोका जा सकेगा।

